Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

June 01, 2016 1 Comment
प्यारे दोस्तो, मेरा नाम वीरू, बीस साल का हूँ। Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ।
मैं आपको अपनी पड़ोसन जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था।
मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पीसी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद जिया से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।
पर मैं तो जिया को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था। मैं नए-नए आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह जिया को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक आईडिया आया।
मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे। मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी मिल गई। वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली है।
मैंने पूछा- क्या है इसमें ?
तो उसने बोला- मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।
मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें !
तो वो राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।
वो जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं उसने अपने घर वालों को इसके बारे में बता दिया तो?
मैं बहुत डर गया था।
उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।
उसने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है !थोड़ी देर में उस लड़के ने उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए। उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर रहे हैं?
तो मैंने उससे कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी ? उसने कहा- नहीं तो।
फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका लण्ड चूसने लग गई।
उसने कहा- मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।
मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।
मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- नहीं किया।
मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।
तभी मैंने उसके पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- यह क्या कर रहे हो तुम?
मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा और उसके टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों दबाने लगा और वो सिसकियाँ लेने गई। अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।
मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?
तो उसने कहा- हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?
मैंने कहा- अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।
उसने- कहा कैसे?
तो मैं कहा- तुझे मेरा साथ देना होगा !
तो उसने हामी भर दी।
मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था। फिर मैंने दोनों को उतार फेंका। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है !
और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।
मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।
मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने लगा तो वह पागल होने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि ज़िया एक दम चुदने को तैयार है।
पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक उठी,”दर्द हो रहा है।”
तो मैंने कहा,”जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।”
उसने कहा,” ठीक है।”
फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी। फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब काहे की शर्म !
और मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे हाथ अण्डरवियर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने उससे कहा- यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।
फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत मजा आता है !
तो उसने कहा- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।
तो मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।
मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में लेते ही निकाल दिया। मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।
फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली और जीभ से चोदने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- वीरू ! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं?
वो बोली- हाँ ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।
मैंने कहा- थोड़ी देर में यह दर्द खत्म हो जाएगा।
उसके मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- सी……सी…स्…आ…अच्छा लग रहा … और चूसो और !
उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और उसकी चूत ने अंदर से सफ़ेद सफ़ेद सा पानी छोड़ दिया। जिसे मैंने अपने मुँह पर महसूस किया और मेरा भी वीर्य निकलने वाला था और मैं उसके मुँह में झड़ गया।
उसने कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- प्यार की निशानी है। उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। ज़िया सिसकारियाँ भरने लगी।
फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। जिया की चूत कुंवारी होने के कारण काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि जिया जोर जोर से चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो ! मुझे कुछ नहीं करना।
मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया, उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।
मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी। मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार नहीं थी। और इस झटके के साथ ही जिया अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी। अब मैं थोड़ी देर के लिए रुका और उसके मम्मे मसलने लगा। उसके होठों को चूमने लगा, अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी।
वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, एक बार लगा कि मैं जिन्दा बच पाउंगी।
मैं बोला- मेरी जान ! दर्द तो एक बार हुआ होगा, लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं?
जिया ने कहा- हाँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में डालते रहो। सच में आज ज़न्नत जैसा अहसास हो रहा है।
मैंने कहा- मेरी जानू ! अभी तुमने ज़न्नत देखी ही नहीं है, आगे आगे देखो, मैं तुम्हें क्या क्या और दिखाता हूँ।
इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। जिया इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, इस कारण उसकी जोर की चीख निकल गई और बोली- प्लीज़ ! तुम अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ निकाल लो अपना लण्ड ! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।
मैं उसकी बातों पर ध्यान ना देकर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को उसकी चूत धीरे धीरे आगे पीछे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको पूरा मज़ा आने लगा। उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लण्ड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बोलने लगी- यस यस्स्स और जोर से चोदो वीरू , मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी चूत को फ़ाड़ दो और मेरी चूत की प्यास को मिटा दो।
इस पर मैं उसको और जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया।
मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो ! की रट लगा रही थी।
मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा।
फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लण्ड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो भी मेरे साथ ही झड़ गई, फिर हम दोनों एक साथ ले लेट गए।
फिर तो मैंने और जिया ने एक बार और सेक्स किया! उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी गांड में लण्ड घुसाने लगा। उसकी गांड भी बहुत कसी थी। मैंने पूरा दम लगा कर पूरा का पूरा लण्ड उसकी गांड में पेल दिया और धक्के मारने लगा। एक बार तो उसको दर्द हुआ फिर उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो-तीन मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और लण्ड को गांड से निकाल कर फिर से उसकी चूत में डाल दिया। कुछ ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
उसने कहा- खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लण्ड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लण्ड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
अब मुझे दर लगने लगा कि वो कहीं गर्भवती न हो जाये इसलिए मैंने उसको ई-पिल लाकर खिला दी।
अब जब कभी वो अकेली होती तो हम सेक्स करते और आज तक मैं उसके साथ सेक्स कर रहा हूँ।

साळ्याच्या पत्नीची जवाजवी-Marathi sexy story

May 30, 2016 Add Comment
माझे नाव विवेक आहे, माझे वय ३० आहे, माझे लग्न २०१० मध्ये  झाले होते, माझ्या बायोकोचे दोन भाऊ आहेत आणि दोघे मोठे आहेत. ही गोष्ट सर्वात मोठ्या भावाच्या अजयच्या पत्नीची स्नेह्लताची आहे, जिचे वय ३३ आहे, रंग एकदम गोरा आहे आणि तिचे वय २५-२६ सारखे दिसते.  अजय बिकानेर मध्ये सरकारी नोकरी करतो.
सोनू(स्नेहलताचे घरचे नाव) गृहिणी आहे, तिचे डोळे मोठे मोठे आहेत, तिचे बॉल पण मोठे आहेत आणि गांड बाहेर आलेली आहे. तिची उंची ५’३’’ असेल. माझी नजर आधीपासून तिच्या वर होती, ती पण मला जेव्हा भेटायची तेव्हा माझ्या बरोबर मस्ती करून मला एक डोळा हळूच मारायची.
मी तिला भाभीजी म्हणून हाक मारायचो.
एक वेळा मी काही कामाने बिकानेर ला गेलो होतो तेव्हा मी तिच्या साठी खूप सुपारी घेतली होती आमच्या सोनी समजात सुपारी जरुरी असते.
जेव्हा मी पोचलो तेव्हा सकाळचे १० वाजले होते, माझा साळा नोकरी वर गेलेला होता, त्यांचा ७ वर्षाचा मुलगा शाळेला गेला होता आणि भाभीजी घरात एकटी होती.
मी पोचलो आणि त्यांनी मला नमस्कार केला. ती मस्त नाईत सूट मध्ये होती आणि खूप मस्त माल दिसत होती.
मग आम्ही आत गेलो आणि तिने चहा बनवला आणि जशी ती माझ्या समोर वाकली तिच्या मस्त बॉल चे दर्शन मला झाले.. अह्हह मजा आली मला.
तिने ब्रा घातली नव्हती.
माझा लवडा तंबू बनवायला लागला.
वाह्ह्ह काय आहे माझ्या तोंडून अचानक निघाले आणि हे तीने ऐकले होते.
मी तिला म्हणालो – भाभीजी तुमच्या चहाची सुगंध फार मोहक आहे. ती हसली.
ती म्हणाली – द्या माझी सुपारी..
मी चहा पीत म्हणाले – स्वतः शोधून घ्या.
आणि दोघे हसलो.
मग मी म्हणालो- भाभीजी माझ्या अंघोळीची व्यवस्था करा.
तर ती म्हणाली – आता राहू द्या जीजू जी, आधी मी अंघोळ करते आणि ती बाथरूम मध्ये गेली.
ती अंघोळ करून बाहेर आली आणि माझे तोंड उघडेच राहिले ती फक्त ब्लाउज आणि पेटीकोट मध्ये होती, उघडे केस होते, तिची चिकणी कमर आणि उघडी बेंबी खूप सुंदर दिसत होती.
ती मला म्हणाली – काय पाहत आहात जीज्जू?
मी दचकलो – काही नाही.
आणि ती जवळून तिच्या शरीराचा सुगंध पसरवत गेली.
मी तिची गांड पहिली, बाहेर आलेले गोल मटोल पाव फार मोहक दिसत होते.
ती मागे फिरली आणि म्हणाली जीजू अघोळ करायला जायचे नाही का?
मी मग अंघोळ करायला गेलो.
मी तिला आठवून मुठ मारून घेतली आणि शांत झालो.
मी बाहेर आलो आणि तोपर्यंत तिने साडी घातली होती.
मी तिला पाहून म्हणालो – आज कुणाचा मृत्यू होणार आहे?
तुझा , ती एक डोळा मारून म्हणाली.
हे ऐकून मी वेडा झालो आणि माझा टोवेल निघाला, मी तिच्या समोर फक्त बनियन आणि चड्डी घालून होतो.
तिने माझा लाठ्लेला लंड पाहून तोंड फिरवले आणि मी माझे टोवेल घेऊन रूम मध्ये पळालो.
मग आम्ही जेवायला बसलो आणि ती माझ्या समोर बसली.
आता माझे पाय तिच्या पायाला लागले, तिचे नाजूक पाय मला खुप आवडले.
तिने पाय हलवले नाहीत आणि ती हळूच कधी कधी हलवत होती… मी परत उत्तेजित होऊ लागलो.
आम्ही जेवण केले, तोपर्यंत ११:३० वाजले होते. मग ती म्हणाली – जीज्जू मला मुलांना जेवण देण्यासाठी शाळेला जायचे आहे, तुम्ही येणार का?
मला तर एवढेच हवे होते, मी हो म्हणालो आणि मग आम्ही तिची गाडी घेऊन निघालो.
मी मागे बसलो होतो, तिचे रेशमी केस मला तोंडावर येत होते.
अचानक तिने ब्रेक मारली आणि मी तिला चोकटलो आणि मग परत मागे गेलो.
थोडे पुढे जाऊन तिने परत ब्रेक मारली आणि मी परत पुढे चिकटलो, मला समजले कि ती जाणून बुजुन असे करीत आहे.
एवढ्यात शाळा आली.
ती आत गेली आणि परत बाहेर आली, बाहेर येताना तिने एक मस्त स्माईल दिली.
आणि तिने गाडी चालू केली. मी तिला चिटकून बसलो आणि माझे हात तिच्या मांडीवर ठेवले. ती सारखे सारखे ब्रेक मारत होती ज्यामुळे माझा लंड तिच्या कमरेला खाली लागत होता.
मी एक हात तिच्या उघड्या केसाकडे केला आणि यावेळी ब्रेक मारताच मी माझे ओठ तिच्या नाजूक माने वर ठेवले आणि लगेच मागे घेतले.
तिने परत ब्रेक मारली आणि मी माझे तोंड उघडून तिच्या माने पाशी टेकवले आणि चुंबन केले. माझा दुसरा हात तिच्या पोटावर होता. ती थोडी वर झाली आणि माझ्या लंडावर बसली. आता तिने माझा लंड तिच्या मस्त गांडी खाली दाबला होता. मी मागून तिच्या मानेवर ओठ फिरवू लागलो आणि ती अजून मागे होऊ लागली.
असे करत करत घर आले.
आम्ही सरळ बेडरूम मध्ये घुसलो.
मग मी तिच्या गळ्यावर कीस केली पण ती मला काही बोलली नाही आणि मग मी तिच्या ओठावर कीस केली आणि तिच्या डोळ्यात पहिले तर ती खूप खुश होती. मग आम्ही १५ मिनिटे सतत कीस केली आणि मी जवळ असलेल्या बाटलीतून पाणी पिले, तेव्हा भाभी म्हणाली कि मला पण पाणी प्यायचे आहे आणि मी तिला बाटली दिली. तर ती म्हणाली कि असे नाही तुझ्या तोंडाने पाणी प्यायचे आहे. मग मी थोडे पाणी तोंडात घेऊन तिच्या तोंडात टाकले आणि मला हे करणे खूप आवडले. मी तिची ब्रा उघडली आणि तिचे गुलाबी निपल चोकू लागलो, ते खूप स्वादिष्ट होते.
मग मी एका हाताने बॉल दाबत होतो आणि दुसर्या हाताने तीची पेंटी काढू लागलो, ती खूप सेक्सी आणि मादक आवाज काढत होती आणि म्हणत होती कि आणि जोरात चोक जानू, मी तुला खूप प्रेम करते उम्म्म्म. जोरात चोक. मग मी तिच्या पुच्चीत बोट घातले आणि तिने मला जोराने पकडले. मला समजले कि तिची पुच्ची खूप टाईट होती आणि खूप ओली झाली होती. मी माझी दोन बोटे पुच्चीत टाकून तिला जवत होतो. ती मला जवण्याची विनंती करत होती प्लीज मला आणि वाट पाहू शकत नाही मला ठोक आता ठोक मला. मग मी तिला ओढून बेडच्या बाजूला केले आणि तिची तहानलेली पुच्ची चाटू लागलो आणि त्यात जीभ घुसवू लागलो.
मग ती पूर्ण जोश मध्ये माझे डोके तिच्या पुच्चीवर दाबत होती आणि ती खूप कामुक झाली होती आणि मला जवायची विनंती करीत होती. आम्ही 69 पोजिशन मध्ये होतो. तिने दहा मिनिटात पाणी सोडले. त्या पाण्याचा वास अजिबात चांगला नव्हता तरी मी ते पिऊन गेलो आणि तिने माझा लंड चोकून बांबू सारखा कडक बनवला होता आणि मी माझा ८ इंच लंड तिच्या पुच्ची जवळ ठेवला आणि त्यावर घासू लागलो. आणि ती म्हणत होती प्लीझ मला ठोक ना आता. मग मी लंड पुच्चीत टाकायचा प्रयत्न करू लागलो पण तो आरामात आत जात नव्हता आणि तो ओल्या झालेल्या पुच्चीवर आजू बाजूला सरकत होता.
मग तिने एक हाताने माझा लंड पकडला आणि तिच्या पुच्ची च्या भोकावर ठेवला आणि मला धक्का द्यायचा इशारा केला. मग मी एक धक्का दिला तर लंड अर्धा आत गेला होता आणि ती रडू लागली. आह्ह्ह उम्म्म्म मला खूप दुखत आहे ऊईईईई आईईईई प्लीज याला बाहेर काढ. मी तिचे न ऐकता एक ठोका मारला आणि लंड पूर्ण आत गेला आणि ती बेशुद्ध झाली.
मग मी तिला कीस केली आणि तसेच पाच मिनिट झोपून राहिलो. मग मी तिचे बॉल घासू लागलो आणि दाबू लागलो पन माझा लंड पण थोडा दुखत होता. मग काही वेळाने तिचा त्रास कमी झाला तर मी माझी स्पीड वाढवली आणि ती मजे घेऊ लागली. मग दहा मिनिटाने तिने पाणी सोडले आणि पाणी सोडताना तिने माझ्या पाठीत तिचे नख ओरबाडले आणि मी पण लगच पाणी सोडले. मग तिने मला हग केले आणि मला म्हणाली कि तू खूप चांगला आहेस आणि मी तुला खूप प्रेम करते. मला खूप मजा आली.
मी तिच्या वर झोपलो. थोडा वेळ गपचूप झोपून ती म्हणाली जीज्जू, दीदी खूप नशीबवान आहे, तुम्ही मला खूप आनंद दिला थेंक यु.
मी तिला ओठावर एक कीस केली.
दुसऱ्या दिवशी मी परत आलो आणि नंतर आम्हाला संधी मिळाली नाही.

देवरच्या मित्राबरोबर भाभीची जवाजवी-Marathi sexy Story

May 30, 2016 Add Comment

हेल्लो मित्रांनो मी आज माझी पहिली गोष्ट सांगत आहे. ही गोष्ट माझी आणि माझी भाभी निशाची आहे. ती दिसायला खूप सेक्सी, होट आणि सुंदर आहे. तिला पाहून मी एकदम वेडा होऊन जातो आणि आम्ही खूप चांगले मित्र पण आहोत. तिचे फिगर ३६-२६-३८ आहे आणि तिचा रंग सावळा आहे आणि ती नेहमी सलवार आणि सूट घालते आणि ती खूप पतिव्रता आहे. पण मला जेव्हा खरी गोष्ट समजली तेव्हा मला खुप आश्चर्य झाले. ही गोष्ट २०१४ ची आहे. मी भाभी चा खूप चांगला मित्र आहे आणि तिला माहिती आहे कि मला जवणे खूप आवडते, पण ती मला कधी भाव देत नव्हती आणि त्यामुळे मला वाटले कि ती खूप पवित्र आहे आणि मला तिला ठोकता येणे शक्य नाही.
एक वेळा मी तिचा फोन चेक केला तर मला समजले कि तिने काही मोबाईल नंबर वर चेट केलेली होती आणि मी जेव्हा शोधले तेव्हा समजले कि तो नंबर माझ्या मित्र आरिफ चा होता, तो कधी कधी माझ्या घरी पण यायचा.
मी नंतर परत काही दिवसांनी चेट वाचले तर त्यात भाभीने लिहिले होते कि तू उद्या घरी ये घरात कोणी नाही. माझा भाऊ नेहमी त्यच्या कामाने घरापासून बाहेर असतो आणि उद्या माझे आई वडील पण काही कामाने जयपूरला जाणार होते आणि मला नेहमी सारखे उठून कोलेज ला जायचे होते. कोलेज करून मी तिथून सरळ माझ्या नोकरीवर जातो आणि मग घरी येताना मला उशीर होतो.
दुसर्या दिवशी सकाळी माझे आई वडील निघून गेले आणि मी ८ वाजता उठलो. मी पहिले तर भाभी आज खूप खुश दिसत होती आणि तिने काळ्या रंगाची सलवार आणि सूट घातला होता, त्यामध्ये तिचे मस्त बॉल सुंदर दिसत होते. मग मी भाभीला सांगितले कि मी रात्री उशिरा येईन आणि मी तेथून निघून गेलो. पण थोडा पुढे गेल्यावर परत मागे फिरलो आणि गच्चीवर गेलो आणि मी वाट पाहु लागलो.
मी पहिले कि खाली निशा उभी आहे आणि फोन वर काही तरी बोलते आहे आणि मी ऐकले कि ती म्हणत आहे प्लीज थोडे लवकर ये आरिफ. एवढे बोलून ती आत गेली आणि मी पाच मिनिटाने घराची बेल ऐकली आणि मी पटकन जिन्यावर आलो आणि मी पहिले तर एकदम हैराण झालो कारण मी पहिले कि भाभी आणि आरिफ एकमेकाला मिठी मारीत होते.
मग आरिफ भाभीला म्हणाली कि आज काय आहे एकदम कयामत दिसत आहेस. मग त्याने तिचे दोन्ही बॉल धरले आणि ती त्याला धक्का देऊन हसत रूम मध्ये निघून गेली हे सर्व पाहून मी चकित झालो होतो आणि विचार करू लागलो हीच आहे काय भाभीची पवित्रता. मग मी हळू हळू एकदम खाली आलो आणि तिच्या घरच्या खिडकी जवळ आलो आणि पहिले तर आरिफ ने तिला मागून पकडले होते आणि तो तिचे बॉल जोराने दाबत होता आणि त्यामुळे भाभी हलकी हलकी गरम होऊ लागली होती.
मग ती एकदम मागे फिरली आणि वेड्या सारखी कीस करू लागली, त्या दोघांची जीभ मस्तीने एकमेकाला भिडत होती. आता आरिफ ने ओठाने भाभीची जीभ पकडून ठेवली आणि ते पाहून माझे हाल होऊ लागले होते. माझा लंड पेंट मध्ये ताठून उभा होता. मी पण त्यला बाहेर काढले आणि हलवू लागलो. आता आरिफ ने भाभी ची चुन्नी काढून टाकली आणि तो तिचे दोन्ही बॉल दाबू आणि घासू लागला आणि भाभी आह्ह्ह ओह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स येस्स करत होती. मग त्याने पटकन कुर्ता काढून टाकला आणि ती गुलाबी ब्रा मध्ये खूप सेक्सी दिसत होती आणि तिचे बॉल आता मोठे वाटत होते.
मग तो तिला म्हणाला कि तुझे बॉल तर एकदम टरबूज सारखे आहेत, हे ऐकून निशा हसू लागली आणि मग तो म्हणाला कि चल मी तुझे आंबे चोकतो. मग आरिफ ने ब्रा ओढून काढून टाकली आणि मी एकदम हैराण झालो कारण भाभी चे दोन्ही बॉल एकदम टाईट कसलेले होते आणि तिच्या निपल वर काळे काळे डाग होते हे सर्व पाहून मी एकदम वेडा झालो होतो.
आता अरीफ ने निपल चोकने आणि घासणे चालू केले. आरिफ बेडवर बसला होता आणि निशा त्याच्या कडे तोंड करून त्याच्या मांडी वर बसली होती आणि तो एक एक बॉल चोकत होता आणि मी भाभी ची मस्ती पाहून चकित होतो. मग तो म्हणाला कि भाभी आता तुझी पुच्ची पण दाखव आणि तिने तिला बेड वर झोपवले आणि तिची सलवार काढून टाकली.
मी पहिले कि तिने गुलाबी पेंटी घातली होती आणि त्याने ती पकडून फाडून टाकली आणि तो भाभी ला म्हणाला जशी मी आज पेंटी फाडली आहे तशी तुझी पुच्ची पण फाडून टाकेन
हे ऐकून ती म्हणाली तू काय फाडणार मी तुझा लंड खाऊन टाकेन. तिच्या तोंडाने बाहेर पडलेले हे शब्द ऐकून माझा लंड झटके मारू लागला. भाभी एकदम उठली आणि तिने त्याला झोपवून त्याची पेंट काढली आणि लंड सरळ पकडला आणि मग त्याची चड्डी काढून टाकली. त्याचा लंड ८ इंच लांब आणि ३ इंच जाड होता आणि त्याला भाभी तोंडामध्ये घेऊन चोकू लागली आणि त्यावर जोर जोराने किस करू लागली. तो तिच्या तोंडामध्ये कसे तरी जात होता कारण तो खूप मोठा होता आणि तिचे तोंड लहान होते.
मग आरिफ म्हणाला वाहह्छ्ह आज तर खूप मजा आली आणि भाभी उम उम उम करू लागली. मग तो म्हणाला प्लीज आता सोड नाहीतर निघून जाईल आणि मग भाभी ने त्याचा लंड पटकन सोडला आणि मग तो तिचे बॉल चोकायला दाबायला सुरुवात केली. वाह काय मस्त होते तिचे ते छोटे छोटे मुलायम बॉल,तिच्यावर छोटी किसमिस सारखे मनुके. आता तो  त्यांना जोराने चोकत होता आणि तिच्या तोंडून आता आवाज येत होते आअहह उह्ह्ह्हह्ह हाँ आणखी जोरात चोक,खाऊन टाक माझी आईईईईईईईईईईइ आणखी चोक दाब, दाबून पिऊन टाक माझे दोन्ही बॉल अह्हह्ह्हह्ह्ह आईईईईइ .
मग तो तिला उचलून बेडरूम मध्ये घेऊन गेला आणि तिला सरळ जोपवली मग  तिच्या डोक्यावर कीस केली आणि तिच्या गुलाबी गुलाबी ओठांना कीस केली. मग मानेत कीस केली आणि मग असेच बॉलला आणि शेवटी तिच्या पुच्ची जवळ येऊन तिच्या मांडीला किस केली. पण आता तिच्या पुच्ची ची सुगंध त्याला वेड लावत होती. त्याने तिच्या मांड्याना वेगळे करून पहिले तर तिची ती छोटी गुलाबी पुच्ची  नजरे समोर होती. मग त्याने वेळ न घालवता तिच्या पुच्चीत माझी जीभ टाकली आणि चोकू लागला.
त्याने तिची खूप वेळपर्यंत माझ्या जिभेने जवाजवी केली आणि मग काही वेळाने  दोघे 69 मध्ये येऊन दोघांची तहान भागवली. मग तो  तिच्या पुच्ची च्या दाण्याला जिभेने चाटू लागला  आणि ती त्याचे डोके पकडून पुच्ची वर दाबू लागली, जणू पहिल्यांदा कोणी तिची पुच्ची चाटत होते. ती ओरडत होती ओह्छ्ह्ह उम्म्म्मम येस्स्स्सस आणि तो पूर्ण जोशाने तिची पुच्ची चाटत होता. तिने अचानक  डोके जोरात दाबले आणि सर्व रस सोडला आणि  तो पिऊन गेला आणि परत तिला कीस करू लागला.
ती आआहाहः करू लागली आणि तिचे बॉल दाबू लागली अह्ह्ह्हह उह्ह्ह्ह तू आता बास कर आईईईईईइ मी आता राहू शकत नाही.
मित्रांनो ती आता वेड्यासारखी झाली होती. ती तिच्या पुच्चीला त्याच्या जीभेकडे करत होती आणि त्याच्या डोक्याला तिच्या पुच्ची वर दाबत होती आता जेव्हा त्याला वाटले कि ती पूर्ण गरम जाली आहे तेव्हा तो तिच्यावर भुक्या वाघासारखा तुटून पडला आणि तिच्या बॉल ला दाबू लागला आणि चोकू लागला.
मग तिला सरळ झोपवून त्याचा लंड एका धक्यात पूर्ण तिच्या पुच्चीत टाकला. पुच्ची ओली असल्याने लंड सरळ घसरत तिच्या गर्भाशयात धडकला आणि ती ओरडली. मग काही वेळ बॉल ला घासू दाबू लागला आणि मग जोरजोराने धक्के देऊन जवू लागला. आणि ती पण पुच्चीला वर उचलून लंडाने जवायचा आनंद घेऊ लागली..
मग काही वेळाने त्याने  लंड तिच्या पुच्चीच्या भोकावर ठेवला. तो आता हळू हळू लंड तिच्या पुच्चीवर घासू लागला. मग लंड पुच्चीवर ठेऊन हळूच ठोका दिला तेव्हा अह्ह्ह्हह आईईईईईई तिच्या तोंडून एक जोरात किंकाळी निघाली. त्याचा लंड तिच्या पुच्चीत होता. आता ते दोघे एक झालो होते. ती खूप जोरजोराने ओरडू लागली होती आणि त्रासाने व्याकूळ होत होती. मग त्याने काही वेळ थांबून आणखी एक जोरात ठोका दिला आणि बरोबर तिला कीस करू लागला आणि ती जोरजोराने स्स्स्सस्स्स करू लागली आणि ओरडू लागली आह्ह्हह्ह्ह आईईईईईई पण त्याने ठोके लावणे चालू ठेवले.
त्याने तिला १५ मिनिटे जवले आणि तिच्या पुच्चीत गरम गरम लावा सोडला. तो तिला कीस करू लागला आणि काही वेळाने भाभीने त्याचा लंड हाताने पकडला आणि खाली बसून तो तोंडामध्ये घेऊन त्याला चोकु लागली आणि तिने लंड एकदम स्वच्छ चाटून टाकला. मग आरिफ म्हणाला कि भाभी मला आज कामाला जावेसे वाटत नाही आहे पण मी नाही गेलो तर फसेन त्यामुळे मला जावे लागेल. मग भाभी म्हणाली चल ठीक आहे मी तुला नंतर परत बोलावेन कारण मला तुझा लंड खूप आवडला आहे. मग आरिफ ने कीस केली आणि मग हग करून तो कपडे घालून बाहेर आला आणि मी बाथरूम जवळ लपलो. भाभी त्याला सोडायला बाहेर आली, तेवढ्यात मी गच्चीवर पळालो आणि मी पहिले कि भाभी ने एक गोळी खाल्ली ती बहुतेक गर्भनिरोधक असेल

Free Download Sheetal Ki Umang - B - Grade BOLD Hindi Movie

May 27, 2016 Add Comment
 
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Published on Nov 20, 2014
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Marathi 2015 android Incest Kahania

May 23, 2016 Add Comment
Marathi 2015 android Incest Kahania

अल्लादिन व जादूचा दिवा भाग -1

http://storieswithmovies.blogspot.in/2016/05/marathi-2015-android-incest-kahania.html
कोणे एके काळी अरबस्तानात अल्लादिन नावाचा एक तरूण रहत होता. विसेक वर्षाचा हा तरुण आपल्या विधवा अम्माबरोबर त्यांच्या जुन्या घरात अतिशय गरीबीत जीवन कंठत होता. त्याची अम्मा नूरबानु काही श्रीमंतांच्या घरात मोलमजूरी करून कसेबसे जीवन कंठत होते. अल्लादिनची अम्माला काहीच मदत नव्हती. तो आपला टिवल्याबावल्या करण्यात मग्न असायचा. झटपट श्रीमंत कसे होता ये‌इल ही दिवास्वप्ने पाहत तो दिवस घालवी.

एक दिवस रात्रीचे जेवण करुन मायलेक झोपायला जाणार तितक्यात दारावर कोणीतरी थाप मारली. अल्लादिनने दार उघडले. एक चांगले कपडे घातलेला मध्यमवयीन माणुस दारात उभा होता.

“कोणाचे घर शोधत आहात?” अल्लादिनने विचारले.

त्याच्याकडे रोखुन पहात, “अल्लादिन ?” त्या माणसाने आपल्या भसाड्या आवाजात उलट विचारले.

“हो. आपण कोण?”

त्या माणसाने अल्लादिनला मिठीत घेतले. “पोरा मी तूझा काका! तुझ्या बापाचा मी धाकटा भा‌उ अब्बास अलि”

पाहुण्याचा भसाडा आवाज एकुन त्याची अम्मा आतुन धावत आली.”अब्बास अलि!” तिने पाहुण्याकडे एकदा नीट पाहिले व ती अल्लादिनला म्हणाली “बाळा हा तुझा चाचा अब्बास अलि. तुझ्या अब्बांचा धाकटा भा‌उ. त्याला सलाम कर.”

अल्लादिनने सलाम केला व पाहुण्याला दार उधडुन घरात घेतले. चाचाने आत शिरताच अल्लादिनच्या अम्माच्या कमरेवर हात ठेवला हे त्याच्या नजरेतुन सुटले नाही. पण त्याच्या अम्माने अब्बासचाचाकडे पुर्ण दुर्लक्ष केले व ती आत निघुन गेली.

बैठकीवर ठाण मारत हुक्का पित चाचाने त्याच्या जादु‌ई प्रवासाच्या सुरेल गप्पा सांगायला सुरुवात केली. त्याने अल्लादिनला एक नकाशापण दाखवला व नाट्यपुर्ण आवाजात आपला खजीन्याचा शोध कसा चालु आहे हे सांगायला लागला. चाचाचा खजीना अजुनही त्या कागदावरच होता हे ओळखायला अल्लादिनला फारसा वेळ लागला नाही. इतके जग भटकुन आल्यावर चाचाला शोध लागला होता की तो खजीना या गावाच्या जवळच आहे.

अल्लादिनच्या अम्माला ना‌इलाजाने चाचासाठी खास जेवण बनवायला लागले. भरपेट जेवण हाणुन चाचाने आळोखेपिळोखे देत मोठी जांभ‌ई दिली व अल्लादिनच्या अम्माला विचारले “नूर तु दमली नाहीस का?”

“मुळीच नाही” असे म्हणुन नूर आत झोपायला निघुन गेली.

अल्लादिनही आपल्या खोलीत गेला. आत जाताच त्याने दार लावले व चिमणीच्या अंधुक प्रकाशात कपडे काढत झोपण्याची तयारी करू लागला. इतक्यात त्याला त्याच्या पलंगावर कोणी तरी बसल्याची जाणीव झाली.

“अम्मा?” त्याने विचारले.

“बाळा आजच्या दिवस मी तुझ्या खोलीत झोपली तर चालेल का? तुझा चाचा मला रात्री त्रास दे‌इल अशी मला भिती वाटते”

“अम्मा माझी कहीच हरकत नाही.” अल्लादिनने चाचरत उत्तर दिले.

“ठिक आहे तु बाहेर जा. तुझे काम आवरण्याचे नाटक कर. पण तो झोपेपर्यंत तुझ्या चाचाला संभाळ.”

अल्लादिन हो म्हणुन बाहेर गेला. बैठकीच्या खोलीत त्याचा चाचा तर ढाराढुर झोपला होता व मोठ्याने घोरत होता.

हलक्या पावलाने अल्लादिन आपल्या खोलीत परत आला. त्याची अम्मा त्याच्या अरुंद पलंगावर भिंतीच्या बाजुला पांघरुण घेवुन झोपली होती. पण तिचे डोळे उघडे होते. आता अल्लादिनला जरा विचार पडला. कारण त्याच्या लहानश्या खोलीत झोपायला पलंगाशिवाय जागा नव्हती. शिवाय झोपताना त्याला कपड्याशिवाय झोपायची सवय होती.

त्याच्या अम्माला त्याची अडचण समजली. “बाळा मी तुला जन्मल्यापासुन कपड्याशिवाय बघितले आहे. विसरलास? ”

वरमुन अल्लादिनने आपला अंगरखा उतरवला. खालच्या लेंग्याची नाडी पटकन सोडली व तो पायातुन काढत अल्लादिनने पलंगात सुर मारला व पाघंरुणात शिरला. अरुंद पलंगावर त्याने अंग चोरायचा प्रयत्न केला तरी त्याच्या स्पर्श अम्माला झालाच.

बरेच वेळाने त्याला जाग आली तेव्हा तो पलंगाच्या एकदम कडेला आला होता. त्याला दुसरी जाणीव झाली ती त्याच्या शरीराला लागणाऱ्या अम्माच्या शरीराच्या उबेची. मग त्याला एकदम आठवले की त्याची अम्मा अब्बासचाचाच्या भितीने त्याच्या खोलीतच त्याच्या शेजारी झोपली आहे. तिचा हात त्याच्या मानेवर पडला होता व ती अगदी जवळच गाढ झोपली होती. त्याने अलगद अम्माचा हात दुर केला व आवाज न करता उठुन परसात जावुन मुतुन आला. त्याच्या चाचाचा घोरण्याचा आवाज घरभर घुमत होता. परत दाराला कडी लावुन हलकेच पलंगावर पडताना त्याला अम्माचे डोळे उघडे दिसले.

“काय झाले बाळा? तुला काही होत आहे का?”

“नाही अम्मा” तो लाजला
Marathi Sex
“तुला थंडी वाजत आहे. माझ्या जवळ ये झोपायला.”

अंधारात काहीच दिसत नव्हते. त्याने डोळे फाड्फाडुन पाहीले. तो अम्माच्या आणखीन जवळ सरकला. अम्मा त्याच्याकडे पाठ करुन कुशीवर झोपली होती. तो तिच्या जवळ सरकला. त्याच्या हाताला तिने घातलेला पातळ झग्याचा स्पर्श झाला. त्याने तिच्या पाठीवर हात ठेवला. तिने तो हात उचलुन स्वतःच्या कमरेवर टाकला.

“अजुन जवळ ये” अम्मा बोलली. तो तिला चिकटुन झोपला. त्याची छाती तिच्या पाठीला लागली. अल्लादिन खुप लहान असताना त्याचे अब्बा अल्लाला प्यारे झाले. ते गेल्यापासुन लहानपणी अम्माला तो असाच चिकटुन झोपायचा. त्यात नविन काहीच नव्हते. ते बराच वेळ चिकटुन झोपले व एकामेकाच्या शरीराची उबेची मजा घेत होते. तिला कित्येक वर्षानी पुरुषाच्या शरीराची जवळीक मिळत होती.

मग त्याला जाणीव झाली की आपल्या पायांमध्ये आपले लिंग ताठरले आहे व ते मोठे होवुन अम्माच्या कुल्ल्याला टेकले आहे. तो शरमुन थोडा मागे झाला. पण त्याचे ते हत्यार अजुन मोठे होत राहीले व तिच्या कुल्ल्यावर आपटत राहीले. अम्मा जागी असुन काहीच विरोध करत नाही हे पाहुन त्याची उरली सुरली शरम नाहीशी झाली.

त्याची अम्मा काही न बोलता, न हलता त्याच्या लवड्याचे स्पंदन सहन करत राहीली. ती मागे होवुन आपला झगा वर केला. झग्याच्या आत काहीच नव्हते. ती उघड्या शरीराने त्याला अजुन चिकटली व कमरेवर आलेला त्याचा हात आपल्या पोटावर नेला.

बराच वेळ ते तसेच पडुन राहीले. त्याचा लवडा तिच्या नागड्या गांडीवर नाजुक फटके मारत राहीला. त्याने तिच्या पोटावरचा हात सरकवत तिच्या उघड्या स्तनांच्या खालच्या घळीत नेला व एक स्तन वर उचलुन खालुन दाबला. हिम्मत वाढवत त्याने अम्माच्या स्तनाग्राला बोट लावले व वर्तुळाकार फिरवले. तिच्या तोंडातुन अस्पश्ट सुस्कारा सुटला.
अचानच अम्मा हलली. तिचा हात खाली आला व तिच्या कुल्ल्यावर लागणारा अल्लादिनचा सोटा तिने आपल्या छोट्याश्या उबदार हातात पकडला व दाबला. आता अल्लादिनने “स्स्स्स……” केले. तिने काही वेळा तिच्या हातातला त्याचा लंड पुढेमागे केला. आपला एक पाय वर केला व ते भले मोठे धुड हळुहळु आपल्या पुच्चीच्या तोंडाशी नेला. तिची चुत पाझरुन ओली झाली होती. किंचीत वर खाली करत आपल्या पुच्चीला अल्लादिनच्या लवड्याच्या रेषेत आणुन त्याला आत घातला.

अल्लादिन खाली सरकला व त्याने बोटाने अम्माची चिकणी चुत चाचपली. चुतीचे ओले भोक सापडताच त्यावर बरोबर नेम लावला व हळु धक्का दिला. अम्माच्या चीकाने चिकट भोसड्यात त्याचा सोटा दुसऱ्याच फटक्यात आत गेला. तो मागे पुढे करत आपला लंड अम्माच्या फोद्यात ठोकु लागला.

कोणाही स्त्रीला चोदण्याची ही त्याची पहीली वेळ होती. ज्या फटीतुन तो ह्या जगात अवतरला होता त्याच फटीत आपला लंड घालताना त्याला अजिबात शरम वाटत नव्हती. आपल्या अम्मासारख्या सुंदर स्त्रीला चोदायचा आनंद तो मनमुराद लुटु लागला.

नूरबानू तिच्या पतीच्या निधनानंतर एकाकी जीवन घालवत होती. नविन विधवेला अब्बास अली सारख्या अनेक गुंडांनी फितवण्याचा प्रयत्न केला होता पण ती कोणाला बधली नव्हती. पण आज तरण्या अल्लादिनच्या अंथरुणात शिरल्यावर त्याच्या तरुण शरीराची उब मिळताच ती लोण्यासारखी विरघळली. तिच्या पतीपेक्षा लांब, मोठा व जाडजुड असलेला अल्लादिनच्या लंडाचा स्पर्श तिच्या मनातले बांघ तोडण्या‌इतका प्रबळ ठरला.

अल्लादिन तिला मागुन धक्क्यावर धक्के देत होता, त्याचा प्रत्येक धक्क्या बरोबर त्याचा लंड निर्दयपणे खोलवर शिरत होता व तिची चुत लंडावर आनंदाने प्रेमरसाचे फवारे सोडत होती. अल्लादिन अम्माचे दोन्ही स्तन एका हातात घेवुन त्यांची बोंडे पिरगळत अम्माचा आनंद वाढवत होता.

तिने आपला पाय वर केला ती आपल्या तुळतुळीत चुतीवर आपली बोटे फिरवु लागली. स्वतःचा दाणा चिमटीत घेताच तिने अत्यानंदाने एक किंकाळी फोडली व फळाफळा झडली व अल्लादिनच्या गोट्या आपल्या इवल्या हाताने दाबल्या. अल्लादिनच्या लवड्याला अम्माच्या पुच्चीत चाललेला कल्लोळ जाणवला. तिच्या पुच्चीच्या पाकळ्यांनी तो भला मोठा लवडा दाबुन धरला व त्याच क्षणी त्याने जोरदार पिचकारी अम्माच्या उदरात सोडली.

पुढे चालु…………. 

Marathi Sex Stories Wife Seksa Katha

May 23, 2016 Add Comment
Marathi Sex Stories Wife Seksa Katha

http://storieswithmovies.blogspot.in/2016/05/marathi-sex-stories-wife-seksa-katha.html
 समीर त्याच्या “डेन”मधे लॅपटॉप उघडुन त्यासमोर बसला होता. त्याने मेल चेक केले व त्याने त्याच्य आवडत्या मराठी चावट कथा ग्रुपचे पेज उघडले. ग्रुपवर नवीन पोस्ट केलेल्या कथा डाउनलोड करत होता. समीर गेली २० वर्षे बोटीवर प्रथम रेडिओ ऑफिसर, नंतर टेक्नॉलॉजी ऑफिसर व गेली दहा वर्षे सॉफ्ट्वेयर इंजीनियर म्हणुन नोकरी करत होता. हल्ली तो कंन्सल्टंट म्हणुन काम करत होता.

सहाजीकच इतकी वर्षे बोटीवरच्या नोकरीमुळे लग्न झालेले असुनही एका वेळी सलग ४ महिने बोटीवर सेलिंग करताना त्याला एकटे राहुन ब्रह्मचार्याचे पालन करणे भाग पडले होते. घरी सुट्टीवर आल्यावर नविन लग्न झाले होते तेव्हा त्याच्या बायकोला सेक्समधे बऱ्यापैकी इंटरेस्ट होता. पण लग्न झाल्यावर एका वर्षाच्या आत झालेल्या एकुलत्या एक मुलाच्या बाळंतपणानंतर तिचा सेक्समधला रस हळुहळु पार निघुन गेला.

समीर चार महिन्याने घरी आल्यावरही त्याच्या सुट्टीच्या दिवसात बायकोबरोबर सेक्स करायचा चांस त्याला क्वचितच मिळु लागला, इतकी त्याची बायको त्यांच्या मुलात गुरफटुन गेली. समीरचा लंड फारच उठला तर तो शेजारी झोपलेल्या बायकोवर चढायचा, पण ’तो’ क्षण गेला की त्यालाच अपराधी वाटायचे. आपण आपल्या बायकोवर रेप करतो आहे की काय असेच त्याला वाटायचे.

वेश्यागमन हा प्रकार त्याने बोटीवरच्या सहकाऱ्यांच्या आग्रहावरुन एक दोनदा करुन पाहिला. पण त्याला त्या विकतच्या प्रेमात मजा आली नाही व ते त्याच्या नितीमत्तेतही बसत नव्हते. बोटीच्या बंदरातल्या छोट्या मुक्कामात दुसऱ्या चांगल्या बायका पटवणे त्याला शक्य नव्हते. त्यामुळे पोर्नो साहित्य बघणे वा वाचणे व त्याने उत्तेजीत होवुन मुटल्या मारणे हा त्याचा बोटीवरचा सर्वात मोठा विरंगुळा होता.

हळुहळु बायकोला सेक्स नकोसा वाटु लागल्यावरही त्याचा सेक्समधला रस कमी झाला नव्हता. पण बायकोला महिन्यातुन एखादे वेळी झव्न त्याचे समाधान होणे शक्य नव्हते. मग त्याचा हात जगन्नाथ होताच!

समीरने बोटीवरच्या नोकरीतुन सततच्या बोटीवरच्या रहाण्याला कंटाळुन शेवटी निवृत्ती घेतली त्याला आता ३ वर्षे झाली होती. सोफ्टवेयर इंजीनियर असलेल्या समीरची २२ वर्षे नोकरी झाली होती. भरपुर पैसे साठले होतेच त्यामुळे औंधसारख्या पुण्याच्या पॉश वस्तीत मोठा बंगला बांधला तरी त्याचे बॅंक बॅलन्स भरपुर होते.

४२ व्या वर्षी निवृत्ती पत्करताच, पुण्यातल्या एका सॉफ्टवेयर कंपनीने त्याला लठ्ठ पगाराची नोकरी, घर, गाडी सारे काही देवु केले. बोटीवर नोकरीत असताना प्रचंड मोठ्या कंटेनर वा खनीज तेल नेणाऱ्या बोटीवर असलेल्या अत्याधुनीक इलेक्ट्रॉनिक यंत्रणा सुस्थिती राखणे हे त्याचे काम होते. पण निवृत्तीनंतर नोकरी न करता त्याने फ्रिलांसींग कंन्सल्टंसी करायचा निर्णय घेतला. ३ वर्षातच त्याने स्वतःचा निर्णय अचुक असल्याचे जगाला दाखवुन दिले. घरातल्या ऑफीसातुन काम करुन तो भरपुर पैसे कमवत होता व जगातली सर्व सुखे आज उपभोगु शकत होता.

उंच व हॅन्ड्सम समीरची पत्नी सीमा मात्र एक नमुना बनली होती. २० वर्षापुर्वी “मिस मिरज” ठरलेली सीमा बाळंतपणानंतर काही वर्षात एखाद्या फुटबॉलसारखी गोलमटोल झाली होती. जगातले सर्व रोग तिला झाले आहेत यावर तिचा ठाम विश्वास होता. डायबेटीस, ब्लडप्रेशर, गुडघेदुखी असे आजार ती आपल्याला आहेत हे येणाऱ्या जाणऱ्याला सांगुन त्यांची सहानुभुती मिळवीणे हा हल्ली तिचा आवडता उद्योग बनला होता. सुट्टीत घरी आलेल्या समीरची सेक्सची भुक पत्नी म्हणुन भागवली पाहिजे हे तिच्या गावीही नव्हते इतकी ती तिच्या मुलाला संभाळण्यात, कालांतराने त्याच्या शाळा कॉलेज, क्लासचा अभ्यास घेण्यात गुरफटली होती.

पुण्याला सीमा आजुबाजुला वावरत असताना समीरला दुसरी बाई पटवणे तर अशक्यच होते. त्यामुळे रात्री पोर्नो साहित्य हाच घरी पुण्याला असतानाही त्याचा विरंगुळा बनला होता. तो आता वेगळ्या बेडरुममधे झोपायचा. नोकरी संपल्यावर पुण्याला स्थाईक झाल्यावर हल्ली मुलगा अमेरिकेला गेला तरी परिस्थिती बदलली नाही. अजुनही ते वेगळे झोपत होते.

समीरने त्याच्या नव्या बंगल्यात पहिल्या मजल्याच्या बेडरुमच्या वरच्या लेव्हलला ऍटीक म्हणजे एक वळचणीची खोली मुद्दाम बनवली होती. तिथे वर त्याने त्याच्यासाठी एक ऑफिस बनवले, त्याचे “डेन”. त्याने ऍटीकमधे बनवलेल्या ऑफिसचा वर्तुळाकार जिना बोटीवर असतो तसा इतका अरुंद होता, की सीमा तिच्या स्वप्नातही त्यावर चढुन त्याच्या डेनमधे येणे शक्य नव्हते. तिचे भारी वजन व तिचे दुखरे गुढगे तिला समीरच्या ऑफिसच्या जिन्यावरुन कधीच नेवु शकणार नव्हते व तिनेही तिथे कधी पाऊल टाकायचे धाडस केले नाही.

त्याउलट समीरचा दिवसातला बराचसा वेळ त्याच्या “डेन”मधे त्याच्या कामात जाइ. रात्रीचे जेवण झाल्यावर पहाटे उशीरापर्यंत तो तेथे काम करी किंवा नुस्ता टाईमपास करी. डेनमधे त्याने टीवी, केबल, डीव्हीडी, म्युझीक सिस्टीम, मिनी बार, फ्रिज इत्यादी सर्व आधुनीक सोई केल्या होत्या. झोप आली तर त्याने तिथे एक बेड बनवली होती, त्यावर तो ताणुन देई. त्याच्या डेनला जोडुन एक छोटे टॉयलेट व बाथरुमही होते. त्यामुळे तो एकदा वर गेला की त्याला खाली यायची गरज नसे.

चाळीशी ओलांडली तरी समीरची सेक्समधली रुची कायम होती. पण दुर्दैवाने गेली कित्येक वर्षे सीमाचा व समीरचे सेक्ससंबंध हे इतिहासजमा झाले होते. त्यामुळे काम नसेल तेव्हा डिव्हीडीवर ब्ल्यु फिल्म किंवा नेटवर पोर्नो साईट सर्फ करणे व लवड्यावर हातगाडी चालवुन पाणी काढणे हाच त्याचा हल्लीचा विरंगुळा होता.

समीरचा एकुलता एक मुलगा गेल्याच वर्षी अमेरिकेत शिकायला गेला होता. त्यामुळे समीर व सीमाचा मधला संवादाचा एकुलता एक दुवाही निखळला. हल्ली ते दोघे एकामेकाशी फारच कमी बोलत. मुलाचा फोन समीरला त्याच्या सेलवर व तिला तिच्या सेलवर! बाकी सकाळच्या व रात्रीच्या जेवणावेळी त्यांची जी काही बोलचाल होई तिच.

मिरजेत सीमाचा एक धाकटा भाऊ होता प्रकाश. सीमापेक्षा पाच वर्षे लहान. लहानपणापासुन लठ्ठ असलेल्या प्रकाश तरुणपणात तर अतिशय जाडा होत गेला. कदाचीत त्यामुळे तो ३५ वर्षाचा झाला तरी लग्न होत नव्हते. तीन वर्षापुर्वी सीमानेच त्याचे बाहेरगावच्या एका मुलीशी कसेबसे लग्न जमवुन करुन दिले होते.

प्रकाश सर्वच बाबतीत सीमाचा भाऊ होता. तिच्यापेक्षाही लठ्ठ. अगदी तिच्यासारखा चिंतातुर प्राणी. प्रकाशची नावाला मिरजला एल आय सीची एजंसी होती. पण तो दर शनिवार व रविवार पुण्यातच त्याच्या लाडक्या सीमाताईकडे असे. एकामेकाचे डायबेटीस, ब्लडप्रेशरची चौकशी करत काळजी करत रहाणे हा दोघांचा दिवसभरचा उद्दोग.

प्रकाशचे सीमाने ३ वर्षापुर्वी लग्न करुन दिले. त्याची बायको वसुधा उर्फ बेबी ही एका छोट्या शहरातली सर्वसाधारण चेहऱ्याची सामान्य मुलगी होती. ग्रॅजुएट झालेली वसुधा तिच्या लग्नावेळी फक्त २० वर्षाची होती. सीमाने तिचे लग्नानंतर ’प्रियंवदा’ असे काहितरी भयंकर भारदस्त नाव ठेवले होते व ती हट्टाने तिला त्याच नावाने हाक मारे. समीर मात्र तिला बेबी या लग्नापुर्वीच्या तिच्या पेट नावानेच हाक मारे. त्यामुळे बेबीचे व समीरचे छान जमे. हल्ली तर तो तिला “हे बेब्बी” अशी खास हाक मारायचा.
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ते दोघे पुण्याला आले की बायकोकडे लक्ष न देता प्रकाश त्याच्या सीमाताईशी आपापले रोग व त्यावरचे उपाय याची चर्चा करत बसत. इतर वेळी टिव्हीवर्च्या मालिका लाउन बसत. त्यावेळी कंटाळलेली बेबी मुलाला घेवुन समीरशी गप्पा मारायला येई. समीर तिला जोक्स, पीजे व कधी कधी ते दोघेच असताना नॉनवेज पण निरुपद्रवी जोक्स मारुन बेबीचे मनोरंजन करी.

समीरने त्याचे ते पीजे मारले की बेबी लाजुन चुर होई पण तिची काही तक्रार नसे. त्याला माहित होते त्याचे ते बोलणे तिला आवडते. एकंदरीर समीरच्या मोकळ्या उमद्या स्वभावामुळे बेबी त्याच्यावर जाम खुश असे.

बेबी एका छोट्या गावात वाढली होती तरी ग्रॅज्युएट झाली होती व दिसायला चांगली ठेंगणी ठुसकी नवयुवती होती. लग्नाच्या वेळी खुप लुकडी होती तरी तिचे सर्व अवयव जागच्या जागी होते. लग्नाआधी ती दिसायला सामान्य होती, पण आता लग्नानंतर तिचा चेहरा उजळला होता. बाळंतपणानंतर तीही किंचीत सुटली होती. पण त्यामुळे हल्ली समीरला ती जास्त सेक्सी वाटायला लागली व जास्त आवडायला लागली. बेबीचे दुघाने भरल्यामुळे गोळे मस्त मोठे दिसायला लागले होते व तिचे नितंबही पुर्वीपेक्षा गोल झाले होते. तिच्या पोटावर हल्ली पडलेल्या वळ्या त्याच्या खास आकर्षणाचा विषय बनला होता.

बेबीचा दोन वर्षाचा मुलगा तर फारच गोड होता. त्याच्या खेळकरपणामुळे त्याची व समीरची चांगली दोस्ती होती. तो जागा असला तर समीरकडे खेळे. त्याला झोपवणे त्याच्या बापाला प्रकाशला कधी जमत नसे, पण समीरकडे तो बरोबर येई व त्याच्या कडेवर मस्त झोपे.

अशाच एका शनीवारी प्रकाश बायका मुलाला घेवुन त्याच्या बहिणीकडे राहायला आला. रात्रीची जेवणे झाल्यावर समीर नेहमीप्रमाणे त्याच्या डेनमधे सटकला. त्याची बायको सीमाप्रमाणे तिचा भाऊ प्रकाश त्याच्या डेनमधे कधीच येत नसत. अगदी त्यांची इच्छा असली तरी. कारण सीमा व प्रकाशला त्या गोलाकार जीन्यावरुन येणे काही जमले नसते. त्यामुळे त्या दिवशी ही सीमा व प्रकाश नेहमीसारख्या आपल्या आजाराच्या गप्पा मारुन झाल्यावर टीव्हीवरच्या मालिका पाहण्यात गर्क झाले.

समीर डेनमधे लॅपटॉप उघडुन नेट कनेक्ट करून पोर्नो साईट्स पहात होता. इतक्यात कोणी तरी त्याचा डेनचा दरवाजा वाजवला. लॅपटॉप बंद करुन त्याने दार उघडले. कडेवर झोपलेल्या मुलाला घेवुन बेबी आत आली.

“हे बेब्बी! कम!!” समीरने तिला आत यायला हात केला.

“सीमाताई आणी प्रकाश झी मराठीवर मालिका पहाताहेत. मला टीव्ही मालीका पहायला खुप कंटाळा आला, म्हणुन तुमच्याशी गप्पा मारायला आली. दादासाहेब तुमची काही हरकत नाही ना? तुमचे काम चालु द्या.” बेबीने बिचकत विचारले.

समीर उत्तर द्यायच्या आधीच बेबीने कडेवरच्या झोपलेल्या मुलाला खालच्या गालीचावर तिच्या हातातल्या दुपट्ट्यासकट झोपवले.

समीर बेबीकडे पाहत होता. तिने नाईट गाऊन घातला होता. तिचे गच्च भरलेले गोळे व सेक्सी नितंबामुळे दिवसेंदिवस समीरला ती जास्त सेक्सी दिसत होती. “हे बेब्बी तु बस. माझे काम संपलेच आहे. माझ्याशी गप्पा मार. नाहितर तुला टीव्हीवर काही मालीका, सिनेमा वगैरे पहायचा असला तर तू टीव्ही लावु शकतेस. किंवा डिवीडी लावु शकतेस.” समीर तिला बोलला. “माझ्याकडे तुला खास दुसरे काही मजेदार पहायचे असले तरी सांग तेही पाहायची माझ्याकडे सोय आहे. ब्लु फिल्म पण आहेत माझ्याकडे” त्याने नेहमीसारखा जोक मारला.

“ब्लु फिम म्हणजे काय हो दादा?” तिने पण त्याचा जोक त्याच्यावर उलटा मारला.

“बेबी मी तुला सिरियसली विचारतो. तु ब्लु फिल्म काय असते ती कधी पाहीली आहेस का?” समीरला त्याला मिळालेला चांन्स सोडायचा नव्हता.

“दादा मला कोण दाखवणार? आणी ती तर इंग्रजीत असते ना? मग मला कशी कळणार?” तिने विचारले.

“मग काय झाले? ती नुसती पहायची असते. त्यात डायलॉग नसतातच, आणी हली तर या ब्लु फिल्म मराठी भाषेतही मिळतात” समीरने माहिती पुरवली.

“तुमच्याकडे मराठीतली आहे? आणी तुम्ही काय ती बघत होता वाटते मी इकडे यायच्या आधी?” बेबीने बरोबर पकडला त्याला.

“बेबी तुझी सीमाताई आहे ना तिला माझ्याशी बोलायलाही बेळ नसतो हल्ली. मग मी इथे येतो. माझे काम करतो. काम झाले की त्या रोज त्या ब्लु फिल्म बघतो. तुला बघायची आहे का तु बोल बेबी’?”

“पण यांना किंवा सीमाताईंना ते कळले तर?”

“अग मी काही कोणाला सांगायला जाणार नाही. आणी तुही दवंडी पिटत गावभर सांगीतले नाहीस तर कोणालाही समजणार नाही. बोल लगावु क्या? तुला पाहिजे तर मराठी लावतो. लावु? बोल बेबी बोल!”

“इथे कोणी येणार नाही ना वर? सीमाताई? ”

“बेबी इथे सीमा पण येणार नाही आणी तुझा नवराही येणार नाही. त्यामुळे तुला इच्छा असेल तर तु पाहिजे ते इथे करु शकतेस. तुझी इच्छा असेल तर बिंनधास्त बीपी पाहु शकतेस.”

बेबी जरा शंकीतच होती अजुन. तिला ती फिल्म बघायची इच्छा तर होती, पण अजुन ती लाजत होती.

समीरने एक मराठी भाषेत डब असलेली मुळची मल्याळी ब्लु फिल्मची डिवीडी काढली. त्याने एकदा ती मुंबईला विकत घेतली होती पण खर तर त्यानेही ती अजुन पाहीली नव्हती. त्याने डिस्क स्लॉट्मधे टाकुन रिमोट दाबला. फिल्म चालु झाली. एक शाळेत जाणाऱ्या वयाची दिसेल अशी लहानशी दिसणारी खुप गोरी मुलगी व एक काळा मध्यमवयीन पुरुष स्क्रीनवर दिसु लागले.

समिरने रिमोटने आवाज चालु केला. ते दोघे चक्क मराठीत बोलत होते. त्या प्रसंगात ती मुलगी शाळेच्या युनिफॉर्ममधे होती. तो माणुस तिचा बाप होता. बापाला बरे नव्हते, म्हणुन त्याने मुलीला अंगाचे मालीश करायची विनंती केली. मुलगी पालथे झोपलेल्या व फक्त लंगोट लावलेल्या वडीलांच्या अंगाचे मालिश करत होती.

समीर वर बेडवर पाय लांब करुन बसला होता. बेबी त्याच्या जवळच गालिच्यावर तिच्या झोपलेल्या मुलाच्या शेजारी बेडला टेकुन बसली.

“ही मुलगी खरीच शाळेतली असेल काय? आणि तो तिचा खरच बाप आहे वाटते?” बेबी तिच्या शंका विचारत होती.

बेबीने खरच पूर्वी बीपी बघितली नसावी. “अग बेबी हे ऍक्टर असतात.”

बेबी गप्प होवुन पुढे काहिच बोलली नाही व ताठ बसुन फिल्म पाहु लागली. जशी जशी फिल्मची कहाणी पुढे चालु लागली, कॅमेरा तोकड्या स्कर्ट घातलेल्या मुलीच्या अंगाप्रत्यांगाचे व त्या लंगोटातल्या माणसाचे वेगळ्या वेगळ्या कोनातुन चित्र टिपू लागले, ते पाहुन बेबीचा चेहरा आरक्त होत होता. मान किंचीत कलती करून ती एकाग्र होवुन पहात होती

“ओके ओके! जरा हळु बोल. इतक्यात ही गोष्ट जगजाहीर करु नकोस.” शाहरुख हसत बोलला. त्या दोघीही एकदम शांत झाल्या.

“अस करुया आज रात्री तुम्ही दोघी माझ्या रुममधे या. आपण आपले लेसन्स आज रात्रीपासुन चालु करु. हं पण या कानाचे त्या कानाला कळले नाही पाहिजे. ओके? बर इथे तुमचे कोणी बॉयफ़्रेंड आहेत?”

“येस माझा आहे! त्याच नाव रणबीर!” दिपीका लाजत बोलली.

“मी कालच एका मुलाला इथे आल्यावर भेटले आहे. त्याचे नाव इम्रान. पण अजुन तो माझा बॉयफ़्रेंड काही म्हणता येणार नाही.” सोनल शाहरुखच्या डोळ्यात पहात बोलली.

“त्याने तुझा किस घेतला का?” शाहरुखने तिच्या नजरेला नजर देत चावटपणे विचारले.

“ओह या! कालच रात्री त्याने माझा पहिला किस घेतला.” सोनल न लाजता खिदळत बोलली.

“ओके….. ओके……. वेल. ठिक आहे. मी कय सांगतो ते नीट ऐका मुलीनो. हे आपले सिक्रेट आपल्यामधेच राहिल. ओके? सद्ध्या तुम्ही कोणालाही, अगदी तुमच्या मित्रांनाही सांगायचे नाही. ओके? आपले कोचींग व्यवस्थित झाले तर आपण कदाचीत नंतर आपण तुमच्या मित्रांनाही त्यात सामील करु. ओके? काय वाटते तुम्हाला?”

दोघीही विचार करत होत्या. खर तर सोनल पहिल्यापासुन चांगले जाणुन होती या ’प्रायव्हेट कोचींग’ बद्दल. सोनलला यात काहीच प्रोब्लेम नव्हता. तिचे एक मोठे सिक्रेट होते. तिने ते अजुनही दिपीकाला सांगीतले नव्हते. योग्य वेळेची ती वाट पहात होती. तिला आज दिवसभरात त्या दोघी एकट्या निवांत भेटतील तेव्हा ती संधी साधुन दिपीकाला सगळ सांगणारच होती. आता तिला हा चांगला चांस दिसत होता दोघी मिळुन काही तरी नवीन शिकण्याचा.

“आम्ही तुम्हाला प्रॉमिस देतो. आम्ही कोणालाही काही सांगणार नाही. आपल्या डाव्या स्तनांवर हात ठेवुन दोघींनी शपथ घेतली. शाहरुखला उगाचच वाटले की तिथे त्याचा हात ’तिथे’ पाहिजे होता. पण त्याला ती संधी लवकरच व भरपुर मिळणार होती.

त्या रात्री रणबीर व इम्रानला मुलींबरोबर बागेत बसुन पडलेल्या छान चंद्रप्रकाशात गप्पा मारायच्या होत्या. पण दोघी मुलीनी त्यांना शेंडी लावली. “आज आम्हाला दोघींना शाहरुख सरांनी एक असा‌इनमेंट दिली आहे. मेक अप वर. त्यामुळे आज नको. अस का नाही करत तुम्ही? पाहिजे तर तुम्ही दोघे आमच्याबरोबर ये‌ऊ शकता.” शेंडी लावल्याबद्दलचा मोबदला म्हणुन दिपीकाने रणबीरच्या ओठावर ओठ टेकुन त्याचे हळुच चुंबन घेतले. सोनल गालातल्या गालात फक्त हसली.

मेक अप मधे काही त्या दोघांना काही इंटरेस्ट नव्हता. त्यामुळे “नो थॅक्स” करत त्यांनी ना‌इलाजाने नकार दिला आणी त्यांनी आज क्लासमधे शिकलेल्या ’कॅमेरा ऍंगल’बद्दल बोलायला सुरवात केली.

जेवण झाल्यावर रात्री अकरा वाजे पर्यंत सर्वांना मोकळा वेळ असतो. मग या वेळात मुले एक्स्ट्रा क्लासेस घे‌ऊ शकतात. प्रत्येक प्रशिक्षक आपापल्या विषयात मुलांना त्यांच्या आवडीचे विषयात प्राविण्य मिळायची संधी देतात. त्यामुळे त्या दोघी शाहरुखच्या रुममधे जाताना पाहुन कोणाला आश्चर्य वाटायची गरज नव्हती.

शाहरुखची रूम त्या दोघींनी प्रथमच पाहिली. तिथला एकंदर आलीशान थाट पाहुन दोघीही चकीत झाल्या. अतिशय कलात्मक पद्धतीने सजवलेली त्याची रुम खुप मोठी होती. देखण्या ऍंटीक लाकडी फर्नीचरची त्या रुममधे आकर्षक सजावट होती. पण त्यांचे लक्ष वेधुन घेतले ते त्या रूमच्या मध्यभागी असलेल्या बेडने. ती अतिशय मौल्यवान किंग सा‌इज बेड केवळ प्रचंड नव्हती तर फारच बघण्यासारखीही होती.

त्याच्यावर राजस्तानी कशिदाकाम केलेली सुंदर लाल रंगाची चादर पसरली होती. त्याशिवाय कुठल्या तरी कडकी लागुन खालसा झालेल्या राज्यातल्या राजवाड्यातुन मागावलेले विक्टोरीया राणीच्या काळातल्या दोन सोफ्यासारख्या ऐसपैस मोठ्या खुर्च्या त्या पलंगासमोर ठेवल्या होत्या. एका वार्डरोबच्या बाजुला कलात्मकरित्या लपवलेली बाथरूम होती.

सेन्ट्रल एसी असलेली त्या रूममधे पलंगासमोरच्या एका भिंतीवर प्रचंड मोठा एलसीडी टिव्ही व डिव्हीडी व होम थि‌एटर होते.

त्याच्या रुममधे आल्या तेव्हा मुलींच्या अंगावर क्लासचा लोगोवाला टीशर्ट व स्कर्ट असा सकाळपासुन घातलेला युनीफॉर्म अजुनही होता. रॅंम्पवर चालायची सवय असलेल्या दिपीकाने तिच्या चमकत्या लांब केसांचा पोनी टेल बांधला होता. तिच्या सेक्सी चालीने तो पोनी टेलच नाही तर तिचे सुंदर नितंबही लयीत हलत होते. सोनलने तिचे लांब केस सुटे सोडले होते. हलका मेक अप केलेल्या दोघीही अतिशय सुंदर दिसत होत्या.

त्यांना चालताना पाहुन आरामखुर्चीवर बसलेला शाहरुख न राहवुन बोलला. “माय गॉड! तुम्ही दोघी किलर दिसता!” त्याच्या अंगावर जीन्सची शॉर्ट आणी क्लासच्या टी शर्ट घातला होता. मागे रेलुन तो आराम खुर्चीत डॉनच्या ऐटीत बसला होता. त्याचे वाढलेले केस कपाळावर आले होते.

“इंन्शानल्ला! तुम्ही दोघी खरच माल दिसता आहात.” त्याच्या चेहऱ्यावर त्याचे प्रसिद्ध मिश्किल हास्य होते व गालावर खळी पडली होती.

“अहो शाहरुख सर, तुम्ही कशाला आमची फिरकी घेता. तुम्ही अस काही बोलला की मला बा‌ई लाज वाटते.” दिपीका लाजत बोलली.

“ए दिपीका! तुला काय वाटत? मी काही तुमची मस्करी करतो? नो! नेव्हर! नाही नाही! तुम्ही खरच खुप सेक्सी दिसता. मी तुम्हाला नंतर पटवुन दे‌इन. आजच!” शारुख हसत बोलला. “बर आपण आपले आजचे सेशन चालु करुया? मला सांगा कॅमेरासमोर चांगला पर्फोरमन्स द्यायला सगळ्यात मोठा अडथळा कसला असतो?”

“डायलॉग विसरणे.” सोनल पटकन बोलली.

“नाही ते डबींगमधे कव्हर करता येते.” शहरुखने मान हलवत सोनलला समजावले. “आणी काही?”

“डायलॉगचे टा‌इमींग चुकणे?” दिपीकाने घाबरत उत्तर दिले

“नाही. बाकीचे ऍक्टर तुम्हाला संभाळु शकतात. नाही विचार करा! ते असे काही आहे की खुप लोकाना ती गोष्ट त्रास देते आणी त्यांची करीयर बिघडवु शकते.”

“मला माहित आहे. कॅमेराची भिती!” सोनल एक्सा‌इट होत बोलली.

“वेल डन सोनल! एक्झॅक्टली!” शाहरुख खुश हो‌ऊन बोलला.”व्हेरी गूड. आणी ही भिती तुम्ही कशी घालवु शकता?”

दोघींनी विचार केला पण त्यांना काहीच सुचेना. “सर नाही सुचत.” दोघी निराश हो‌ऊन एकदम बोलल्या.

“तुम्ही कधी शाळेच्या शोमधे स्टेजवर भाषण केले आहे?”

“मी केलय अनेकदा,” दिपीकाने अभिमानाने सांगीतले.

“तुझ्या टिचरांनी तुला कधी स्टेजची भिती कशी घालवायची याचे मार्गदर्शन केले होते का?” शाहरुखने दिपीकाला विचारले.

दिपीकाला सुचेना काय उत्तर द्यावे.

“त्यांनी तुला कधी तरी सांगीतले असेल, आठव, की आपण स्टेजवर उभे राहिले की अशी कल्पना करायची की आपल्या समोर बसलेले सगळे उघडे नागडे बसले आहेत. असे दृश्य डोळ्यासमोर आणले की आपली भिती नाहिशी होते.” शाहरुखने हसत माहिती पुरवली.

“हो! हो! मला आठवल. माझ्या एका टिचरने मला असे सांगीतले होते!” दिपीका हसत बोलली.

“ओके! वेरी गुड! मी तेच टेकनीक वापरणार आहे. इंशांनल्ला! तुम्ही मुली आयुष्यात कधीही कोणासमोर लाजणार नाही असे आपण एक आज टेक्नीक आपण शिकणार आहोत.” शाहरुख दोघींकडे काळजीपुर्वक पहात होता. “आपण काय करणार? समोरचे नग्न आहेत असा विचार करण्यापेक्षा, आपणच नागडे होणार आहोत!”

अस बोलतानाच त्याने त्याचा टिशर्ट अंगातुन काढला व त्याचे पोटावरचे ’सिक्स पॅक्स’ त्याने दोघींसमोर उघडे केले. त्याचे ते प्रसिद्ध ६ पॅक ऍब्स फारच कमी लोकांनी प्रत्यक्षात पाहिले होते.

दिपीका चुळबुळत उभी होती. खरतर तिला शाहरुखला संपूर्ण नागड पहायच होत. ’किती मजा ये‌इल’ ती स्वतःशीच विचार करत होती. पण आपले पण कपडे काढायचे म्हणजे? तिला विचार पडला होता.

“सर मी काय करु हे मला समजत नाही.” ती मान खाली घालुन लाजत बोलली.

शाहरुखने तिच्या हनुवटीला बोटाने उचलले. “दिपीका माझ्या कडे बघ. आय कॅन बेट! तुला तुझ्याबद्दल अशी भिती वाटतेय की तुझी फिगर चांगली नाही!” तो तिच्या डोळ्यात पहात होता. त्याचे वाक्य ऐकताच दिपीका एकदम कावरीबावरी झाली. जणु काही तिच्या मनातलेच तो बोलला होता.

शाहरुखने तिच्या डोळ्यात पहात त्याचे बोलणे पुढे चालु ठेवले. ’तुला वाटते की तुझे बूब्स मोठे आहेत किंवा लहान आहेत, किंवा त्याचा आकार बरोबर नाही. तुझे हिप्स बेढब आहेत किंवा तुझे पोट सपाट नाही, याच्यातले काहीतरी तुला नक्की वाटत असेल. रा‌ईट?” अजुनही तो तिच्या डोळ्यात पहात होता.

“सर तुम्हाला कस कळल?” दिपीकाने चकीत हो‌ऊन विचारले.

“हे बघ हा सगळा त्या स्टेज किंवा कॅमेराच्या भितीचाच परिणम आहे.” शाहरुख त्याची मान हलवत बोलला. “बघा मी तुम्हाला माझा अनुभव सांगत आहे. हे पहा आपण एक गोष्ट करुन पाहु. त्यानंतर मग तुम्ही ठरवायचे की तुम्हाला खाजगी कोचिंगची गरज आहे की नाही. मी तुम्हाला नग्न पाहीन, मग तुम्ही मला तुमचे तुमच्या स्वतःच्या शरीराबद्दलचे मत सांगा. तुमच्या स्वतःच्या शरीराबद्दलच्या तुमच्या मतात मला एक जरी तथ्य मला आढळले तरी तुम्ही हा क्लास सोडु शकता. ओके? पटतय तुम्हाला माझ म्हणणे?”

त्याने सोनलकडे पाहिले. ती काहीच बोलत नव्हती पण मनातल्या मनात तिला शाहरुखसमोर कपडे काढायची फार इच्छा होती. मुख्य म्हणजे तिला शाहरुखला नग्न पहायच होत. तिचा हात तिच्या टिशर्टच्या खालच्या टोकाला पोचलाही होता त्याला वर करुन काढायला. शाहरुखला सोनलबद्दल खात्री होती. प्रश्न फक्त दिपीकाचा होता.

दिपीकाने सोनलकडे पाहिले. दोघींची नजरानजर झाली. दोघींनी एकीमेकीला न बोलता होकार दिला.

“ठिक आहे.” दिपीका पुटपुटली. ती जरा कुरकुरत होती, पण तिलाही शाह्रुखला नग्नावस्थेत पहायची खुप इच्छा होती, आणी आज ही संधी तिला सोडायची नव्हती. तिने तिचा टिशर्ट काढला. नंतर तिने स्कर्ट उतरवला. तिच्या अंगावर फक्त एक नाजुक लेसवाला ब्रा व त्याला मॅचींग चड्डी उरली होती. तिच्या बाजुला सोनल तिच्या काळ्या रंगाच्या ब्रा व पॅंटीवर उभी होती. तिने तिचा टिशर्ट व स्कर्ट बाजुच्या आराम खुर्चीवर फेकले होते. दिपीकाने तिचे कपडे त्याच खुर्चीवर टाकले.

शाहरुख त्याच्या शॉर्टवर उभा होता. “सर तुम्ही नाही का काढणार तुमची शॉर्ट?” सोनलने त्याला विचारले.

“काश मी तस करु शकेन! मला तुम्हा मुलींना आतापासुन नर्व्हस करायची इच्छा नाही. कारण माझ्या शॉर्टच्या आतमधे मी काहीच घातले नाही” तो दोघींकडे आळीपाळीने पाहत नाटकी आवाजात म्हणाला.

“मी काही नर्व्हस होणार नाही.” सोनलले न लाजता त्याच्याकडे पहात हात मागे नेले व तिची ब्राची स्नॅप उघडली. खांद्यावरच्या पट्ट्या हाताने काढत तिने तिचे स्तन उघडे केले. मध्यम आकाराचे तिचे स्तन व त्यावरील छोटे चॉकलेटी निप्पल सगळ्यांच्या समोर उघडे झाले.

दिपीका अजुनही संभ्रमात होती. सोनलने ते ओळखुन ती तिच्याकडे वळली व तिने, “ए दिपीका! मी तुला मदत करते.” असे म्हणत तिने दिपीकाची ब्राची स्नॅप उघडली. दिपीका अजुनही तिच्या हाताने स्तनावर ब्रा धरुन ठेवली होती. ते पाहुन सोनल खाली वाकली व तिने दिपीकाची पॅंटी खचकन खाली खेचली.


“बेबी मला तुझे दुदु दे ना” “प्या! चांगले पोट भर प्या!!” समीर वेळ न दवडता तिचे दुधाने भरलेले गोळे हातात पकडले व स्तनाग्र ओठात कैद करुन चोखायला लागला. एकामागुन एक चोखुन दोन्ही स्तन त्याने पिळुन काढले व रिकामे केले. बेबी त्याच्या मांडीवर पडुन त्याला स्तन तोंडात भरवत मदत करत होती.

“बेबी तुझी चड्डी काढ” समीरने तिचा स्तन चोखताना सुचवीले खरे, पण त्याआधीच तो स्वतःच तिची चड्डी खेचायचा प्रयत्न करु लागला. तिने तिचे नितंब वर करुन त्याला मदत केली. तिची चड्डी जमीनीवर फेकुन तिचा गाउन पोटावर सरकवला व तिच्या मांड्या व तिची योनी उघडी केली. त्याने तिचे पाय फैलावले.

तिच्या फुललेल्या योनीवरचे केस नुकतेच काढलेले होते. त्यावरचे खुंट त्याच्या बोटाना टोचत होते. तिची मांसल योनी त्याने अनेकदा पाहिलेल्या फिल्म व पोर्नो साईटवरच्या चित्रांपेक्षा त्याला कितीतरी सेक्सी वाटली. तिच्या त्या एकदम फुगलेल्या योनीवर हात फिरवायला त्याला मजा येत होती.

“तुझी छकुली फारच मुलायम आहे ग बेबी! मी जरा नीट हात लावुन पाहु का?” समीरने तिच्या कानात प्रश्न विचारला.

“मी कुठे तुम्हाला नको म्हणले? आणी तुमचा हात तर माझ्या छकुलीवर परवानगी न घेताच चांगला फिरतो आहेच न.” तिने समीरला बरोबर पकडला.

समीरने तिच्या योनीच्या फटीत आत बोट फिरवायला सुरवात केली. तिची योनी पाझरत होती. त्याच्या योनीत फिरणाऱ्या बोटाने त्याने बेबीची आपल्या आवरणच्या बाहेर फुगून आलेली क्लिट शोधुन काढली. त्याच्या त्या स्पर्शाने बेबीने सुखावुन एक सुस्कारा सोडला. समीर त्याचे बोट बेबीच्या योनीत आत बाहेर करत बोटाने चोदु लागला.

“दादा लवकर करा ना!”

“काय लवकर करु? तु काय करायचे हे सांगीतलेस तरच मी करू शकीन ना बेबी!” त्याने तिला चिडवले.

“असे काय करता दादा. मी नाही जा! मला बाई लाज वाटते” पण ती हे बोलतानाही न लाजता त्याच्या बोटावर तिची योनी रगडत राहीली.

“दादा आता मला अजुन छळु नका. मला लवकर खाली जायचे आहे. तुम्ही काही करणार असाल तर लवकर करा, नाहितर मी चालले.” पण तिला कुठेही जायचे नव्हते! कारण त्याच्या अंगाला घट्ट लपेटुन तिच्या योनीत आत बाहेर होणाऱ्या त्याच्या बोटाचा ती शक्य तितका आनंद घेत ती बसुन होती.

“तुझा गाऊन काढ”

“दादा तुम्ही अगोदर माझ्या अंगावरुन उठलात तर मी गाउन अंगातुन काढु शकेन ना!”

तो तिच्या अंगावरुन दुर होताच तिने पटकन डोक्यातुन गाऊन काढुन जमिनीवर टाकला. तिने खांद्यावर मोकळी पडलेली ब्रासुद्धा त्याच्या शेजारी फेकुन दिली व ती त्याच्यासमोर ती संपूर्ण नागडी झाली. लाजुन तिने हाताने डोळे मिटुन घेतले.

“बेबी तु बेडवर झोप बर.”

बेबी लाजत बेडवर झोपली व भिंतीकडे तोंड करत समिरकडे पाठ करुन झोपली. समीरनेही त्याचा लेंगा काढुन टाकला. हातात लंड पकडुन समीर तिचे कमनीय पाठमोरे नग्न शरीर बराच वेळ पहातच राहिला. हळुच तो तिच्या बाजुला बसुन झोपलेल्या पाठमोऱ्या बेबीच्या अगदी जवळ सरकला. हातातला लंड तो तिच्या नितंबावरुन फिरवु लागला. झोपलेल्या बेबीची समीरकडे पाठ होती. तिने मान वळवुन आपला एक पाय उचलुन समीरच्या मांडीवर पलीकडे टाकला व फैलावला. दुसरा पाय तिने तिरका करुन तिची गांड समीरच्या दिशेने केली.

त्यामुळे तिची योनी पूर्ण उघडली. समीरने तिला चिकटत त्याच्या लवड्याचा सुपडा तिच्या ओल्या योनीमुखावर ठेवला. तिथे त्याचा सुपडा फिरताच बेबीने एक मोठा हुंकार दिला.

समीरने तिच्या पायातुन फाकवलेल्या योनीत मागुन लवडा फिरवला व तिच्या योनीरसाने सुपडा ओला केला. तिचा पाय आणखीन वर उंचावुन तिच्या योनीमुखावर त्याचा लवड्याचा नेम लावला.

तिने जोरात हुंकार देवुन तिची योनी त्याच्या लंडावर रेटली. समीरचा लंड तिच्या योनीच्या पाकळ्यांना आतल्या बाजुने घासत होता. त्याने तिची कंबर पकडुन एक धक्का दिला. तिच्या टाईट योनीत त्याचा सुपडा शिरला. समीर धक्के देत होता. त्याचा लवडा तिच्या योनीत आत बाहेर करु लागला. एका हाताने तो तिचे स्तन पिळत होता. बराच वेळ त्या स्थितीत तिला चोदुनही त्याचा लंड पुर्ण तिच्या पुच्चीत आत जात नव्हता व समीरला पाहिजे तशी तिला चोदायची मजा घेता येत नव्हती.

समीरने तिला चोदणे थांबवले व तो मागे होत त्याचा लंड बाजुला केला.

“दादा थांबु नका. करा न जोराने.” तिला आता अजिबात धीर धरवत नव्हता. तिने रागाने त्याला फटका एक फटका सुद्धा मारला.

“बेबी माझ्यावर चढ. ये माझी राणी ती! ये लवकर.” त्याने तिच्या कानात सांगीतले व तो बेडवर पाठीवर आडवा झाला. त्यालाही आता धीर धरवत नव्हता. त्याने तिचे कुल्ले पकडुन तिला वळवले व तिचे तोंड त्याच्याकडे केले. तिचे टपोरे गोल स्तन तिच्या हालचालीने हिंदकाळत होते. त्यावरची काळी तपकीरी बोंडे ताठरलेल्या अवस्थेत समीरकडे डोकी वर करुन पहात होती. समीरने तिचा हात धरुन तिला त्याच्या अंगावर खेचले. समीरच्या अंगावरुन पाय टाकत ती त्याच्यावर बसली. गुडघ्यावर रांगत तिने त्याचा लवडा हातात घेतला व तिच्या मांड्याच्या मधे नेला.

तिला तिच्या योनीचा व त्याच्या लवड्याची ताटातुट व विरह असह्य झाला असावा. कारण त्याने न सांगता तिने त्याचा हातातला लवडा तिच्या योनीत भरवला. समीरने जरा जोर लावुन तिला मदत केली. ती वर खाली करत तिच्या योनीत त्याचा लंड घासु लागली. समीर त्याची कंबर उंचावत तिला साथ देवु लगला. तिची योनी आत भट्टीसारखी तापली होती. ती घग सहन न होऊन त्याने त्याचा लंड बाहेर काढला. पण तिने धक्का मारुन परत आत घेतला.

समीरने तिचे कुल्ले पकडुन तिला चोदु लागला. कित्येक महीन्याने त्याला योनी चोदायला मिळाली होती. तिची योनी रसाने ओली झाली असल्यामुळे तिच्या त्या टाईट प्रेमगुहेत त्याला लवड्याने चोदायला मजा येत होती.

बेबीही बरेच दिवसाची भुकेली होती कारण ती तिचे डोळे बंद करुन झवा झवीचा आनंद घेवु लागली. समीरने तिचे स्तन हातात घेवुन एकत्र दाबले व दोन्ही स्तनाग्र एकाच वेळी चोखु लागला. त्याच्या धक्क्याने समीरचा लंड संपुर्ण आत धुसला.

“तुझी छकुली खरच मजेदार आहे ग”

“अहो दादा तुम्ही तुमचा सोटा माझ्या बिचाऱ्या छकुलीत घातला आहे, मला एकदा तरी विचारले का तुला मजा येते आहे की नाही?”

“बर बाई मी विचारतो तुच्या छकुलीला. ’येते का ग मजा?’”

उत्तर म्हणुन बेबीने तिची योनी त्याच्या लवड्याभोवती घुसळली.

“तुझ्या नवऱ्याचा तु घेतेस का असा?”

“अहो ते कधीकाळी त्यांचा उठला, तर ते माझी चड्डी काढतात, त्यांचा पोपट माझ्या मैनेवर घासतात व दोन मिनीटात गळतात.”

“मग तु तुझे समाधान कसे करतेस?”

ती गप्प राहुन त्याच्या लवड्यावर वर खाली होत राहिली. त्याच्या हातात तिचे गरगरीत कुल्ले होते ते तो दाबत तिची चुत मारायला लागला. तिचा हात त्याच्या मोकळ्या हाताला स्वतःच्या स्तनावर दाबत होती. समीरही तिचे त्याच्या तोंडाजवळ आलेले आंबे चोखायला लागला.

“आणखे जोरात करा.”

त्यांनी त्यांची लय वाढवली. तिची योनी आता फुलुन पुर्ण उमलली होती त्यामुळे त्याचा लवडा योनीत सटासट आतबाहेर होऊ लागला. तिही मोठ्या आवेगाने वर खाली होत राहीली.

समीरने तिच्या ओठावर त्याचे ओठ नेली. तिचे ओठ त्याच्या ओठात पकडुन तो तिचे चुंबन घेवु लागला. तिने त्याला साथ तेत तिचे ओठ उघडले व तिची जीभ त्याच्या जीभेशी खेळु लागली. अचानक तिचे शरीर ताठ झाले व डोळे बंद करुन ती मोठ्याने आवाज करत ती झडु लागली, तिचे सर्वांग थरथर कापत होते. मग ती समीरच्या अंगावर ग्लानीत गेल्यासारखी पडुन राहीली.

समीरचा लंड अजुनही कडक होता. काही क्षणात त्याने तिला त्याच्या शरीरावरुन बेडवर ढकलले व तो तिच्या वर आरुढ झाला. तिचे डोळे अजुनही मिटलेले होते. तो तिच्या पायात आला व तिचे पाय त्याने आपल्या खांड्यावर घेतले. तिची योनी हाताने फाकवुन त्याने आपला लंड तिच्या फटीच्या भोकात घातला. यावेळी त्याच्या लवड्याला तिच्या बुळबुळीत योनीत पटकन प्रवेश मिळाला. तिची सुजलेल्या मांसल योनीत तिच्या भोकाच्या वर डोकावणाऱ्या क्लिटला तो बोटाने चाळवु लागला. ती जोरात “आ………आईग………..आ……” आवाज करत परत परत झडत होती.

तिच्या स्तनाना एका हातात घेवुन तो दाबायला लागला. त्याला तिच्या बोंडावर परत दुधाचे थेंब दिसायला लागले. त्याने त्याची जीभ लावुन तिची दोन्ही बोंडी चाटली.

समीरला कळत होते की तो आता गळायच्या बेतात आहे. तो बेबीवरुन उठला. तो बेडवरुन उठुन जमीनीवर उभा राहिला. बेबीला तिच्या सुखात आलेला व्यत्यय आवडला नाही. ती डोळे उघडुन समीरकडे पाहु लागली.

समीरने तिचा हात खेचुन तिला उठवले. ती कुरकुरत उठल्यावर समीरने तिला बेडवर हातावर व गुडघ्यावर रांगायला सांगीतले.

तिची भलीमोठी गांड समीरच्या पुढे आ वासुन होती. तिची गरगरीत गांड हा नेहमीच समीरच्या फॅंटसीचा विषय होता. समीरने तिच्या योनीच्या फटीत बोट फिरवुन चाचपली. तिची योनी भरपुर पाझरत होती. तिच्या कमरेला धरून तिला जरा जवळ खेचुन त्याने त्याचा सुजलेला लवडा तिच्या भेगेत फिरवला. तिच्या दाण्याला त्याच्या लवड्याचा स्पर्श होताच तिने हुंकार दिला. तिने हात मागे नेवुन त्याचा लंड कुरवाळला व त्याला तिच्या उमललेल्या योनीत आत घालायला इशारा केला.

त्याने तिची कंबर हातात पकडुन भसकन लंड आत रेटला. एकाच रेट्यात त्याचा पुरा लंड आत गेला. तिच्या नितंबावर हात फिरवत तो तिला डॉगी स्टाईलने झवु लागला. बराच वेळ तिची सुजलेली गुबगुबीत योनी झवल्यावर त्याचा बंध सुटला व तो तिच्या योनी पिचकाऱ्या मारत झडला.

थकुन तो बेडवर लवंडला. बेबी बाथरूममधे जावुन आली. कपडे घालुन तिच्या मुलाला घेवुन ती खाली कधी गेली हे त्याला कळले नाही.

दुसऱ्या दिवशी डायनींग टेबलवर चहा पिताना समीरने चोरुन बेबीकडे पाहिले. कालच्या डेनमधे घडलेल्या रामायणाच्या काहीच खुणा तिच्या चेहऱ्यावर नव्हत्या. ती शांतपणे सगळ्याना चहा देत होती. प्रकाश तिच्या बहिणीबरोबर काही तरी गंभीर चर्चा करत होता. समीर त्याचे पीजे मारायला लागला. पेपरतल्या बातम्यावर शेरे मारून झाल्यावर त्याने अचानक सीमाकडे पाहत बोलला, “या घरात काल कोणीतरी काहीतरी काहीतरी चावटपणा केला आहे.”

कोणी काहीही बोलायच्या आधी बेबीने हसत हसत शाल जोडीतला दिला. “आम्ही तरी नाही! दादासाहेब आम्ही तर इतके सभ्य आहोत की आमच्या स्वतःच्या घरातपण आम्ही कुठचाच चावटपणा करत नाही.” प्रकाशला काहीही न कळुनही तो हसला. सीमाला काहीच कळले नव्हते. त्यामुळे ती गप्प राहिली.

पण समीरला बेबीची तक्रार बरोबर समजली होती! 
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