जीजी ना कहा कर-Hindi sexy Story

September 11, 2016 Add Comment
जीजी ना कहा कर-Hindi sexy Story
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बात उन दिनो की है जब मैं गयारहवीं कक्षा में पढ़ता था। हमारे पड़ोस में एक पंजाबी परिवार रहता था जिसमें सिरफ़ तीन ही सदस्य थे। एक 70 वर्षीय बुजुर्ग, एक लड़का और एक लड़की। लड़के की उमर लगभग 24-25 साल की रही होगी और लड़की की उम्र 20-21 साल की होगी। बुजुर्ग उन दोनों के पिता थे और अकसर बीमार से ही रहते थे। जबकि उन दोनों की माँ की मृत्यु हो चुकी थी। वैसे तो उस परिवार में 5-6 लड़कियाँ और भी थी लेकिन वो सब काफ़ी उमर की थी और सब की शादी हो चुकी थी और अपने पति के साथ अपनी ससुराल में ही रहती थी जो कि कभी-2 अपने पिताजी को देखने परिवार के साथ 2-3 दिन के लिये आती रहती थी। हमारा भी उस परिवार में काफ़ी आना जाना था।

लड़के का नाम राजेश और लड़की का नाम दीपाली था। दीपाली बहुत ही खूबसूरत थी। मैं राजेश को भाई साहब और दीपाली को जीजी कहता था। दीपाली का बदन मानो भगवान ने सांचे में ढाल कर बनाया हो। गोरा चिट्टा रंग हल्का गुलाबीपन लिये जैसे कि दूध में चु्टकी भर केसर डाल दी हो। शरीर 36-24-38। चूची एक दम सख्त और उभरी हुई और उसके चूतड़ भारी थे, लगता था कि उसके चूतड़ की जगह दो गोल बड़ी बड़ी गेंदें हो।

वो अधिकतर सलवार कुरता पहनती थी और जब चलती थी तो ऐसा मालूम होता था कि दो गेंद आपस में रगड़ खा रही हो। जब वो हंसती थी तो गालो में बड़े प्यारे गढ्ढे पड़ते थे जिस से वो और भी खूबसूरत लगने लगती थी। वोह बोलती बहुत थी और एक मिनट भी चुप नहीं बैठ सकती थी। उसमें एक खास बात थी कि वो किसी की भी चीज में कोई नुक्स नहीं निकालती थी चाहे उसको पसंद हो या ना हो। वो हमेशा यही कहती थी कि बहुत ही प्यारी है। यदि उसको कुछ खाने के लिये दो और वो उसको पसंद नहीं आई हो पर वो तब भी उसकी तारीफ़ ही करती कि बहुत ही स्वादिष्ट बनी है। इस बात की हम सब हमेशा ही दीपाली की तरीफ़ किया करते थे।

हमारी कालोनी के सभी लोग उसके दीवाने थे और एक बार बस उसको चोदना चाहते थे। मैं भी अकसर सोचता था कि काश मैं दीपाली को चोद सकूँ और एक दिन ऐसा मौका आ ही गया। सितम्बर का महीना चल रहा था। उस दिन रविवार था और सबकी छुट्टी थी और समय रहा होगा लगभग 11 बजे सुबह का। मैं किसी काम से अपनी छत पर गया था। हमारी दोनों की छत आपस में मिली हुई हैं और छत से उनके कमरे और बाथरूम बिलकुल साफ़ दिखाई देते हैं। तो उस रोज जब मैं छत पर गया तो दीपाली के गाने की आवाज आ रही थी सो मैं वैसे ही उनके घर की तरफ़ देखने लगा तो मैं चौंक गया कयोंकि दीपाली बिलकुल नंगी बाथरूम में पटरे पर बैठी थी और टाँगें चौड़ी कर रखी थी।

सच दोस्तो ! मैं तो देखता ही रह गया। दीपाली की चूचियाँ एकदम गोरी और तनी हुई थी और जैसा कि मैं ख्यालों में सोचता था, उससे भी अधिक सुंदर थी। उसकी गोरी चूचियों के बीच में हल्के गुलाबी रंग के दो छोटे-2 घेरे थे और उनमें बिलकुल गुलाबी रंग के निप्पल थे जो कि बाहर को निकले थे। उसका सारा शरीर बहुत ही चिकना और गोरा था और टाँगों के बीच में तो पूछो ही मत। वहाँ उसकी चूत पर काले रेशमी बाल नज़र आ रहे थे और उनके बीच हल्की सी गुलाबी रंग की दरार नज़र आ रही थी। दरार में ऊपर की तरफ़ एक छोटा सा चने जैसा दना चमक रहा था। वो उस वक्त कपड़े धो रही थी और उसका सारा ध्यान उस तरफ़ ही था।

दीपाली को इस हालत में देख कर मेरा लण्ड एकदम से तन कर खड़ा हो गया मानो वो इस हसीन चूत को सलामी दे रहा हो। मन कर रहा था कि मैं फ़ोरन ही वहाँ पहुँच जाऊँ और दीपाली को कस कर चोद दूँ पर मैं ऐसा नहीं कर सका। मैं काफ़ी देर तक वहाँ खड़ा रहा और दीपाली को ऐसे ही देखता रहा और ऊपर से ही अपने लण्ड को पकड़ कर सहलाता रहा। मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी। मेरा गला एकदम से खुश्क हो गया था कि मैं थूक भी ठीक से नहीं निगल पा रहा था। मेरी टाँगें काम्प रही थी और ऐसा लग रहा था कि मेरी टाँगों में बिलकुल दम नहीं रहा और मैं गिर जाऊँगा।

मैं इस हालत में उसको करीब 15-20 मिनट तक देखता रहा। वो बार-2 सर झुका कर टाँगों में अपनी चूत की तरफ़ देख रही थी और एक कपड़े से चूत के बालों को रगड़ रही थी जिस से उसकी चूत के कुछ बाल उतर जाते थे। मैं समझ गया कि आज दीपाली अपनी चूत के बाल हेयर-रिमूवर से साफ़ कर रही है। मैं उसे बड़े ही गौर से देख रहा था कि अचनक उसकी नज़र मेरे ऊपर पड़ गई और उसने एकदम से बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया।

यह देख कर मैं बहुत डर गया और छत से नीचे उतर आया। मैं सारे दिन इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि अगर जीजी इस बारे में पूछेंगी तो मैं क्या जवाब दूंगा लेकिन कुछ सूझ ही नहीं रहा था। मैंने सोचा कि मैं 2-3 दिन उसको दिखाई ही नहीं दूंगा और उसके बाद मामला कुछ शान्त हो ज़ायेगा और तभी देखा जयेगा कि क्या जवाब देना है। मैं एक दिन तो दीपाली से बचा ही रहा और उसकी नज़रों के सामने ही नहीं अया। अगले दिन पापा और मम्मी को किसी के यहाँ सुबह से शाम तक के लिये जाना था और ड्राइवर आया नहीं था तो पापा ने मुझको कहा कि मैं उनको कार से छोड़ आऊँ और शाम को वापस ले आऊँ।

मैं उनको कार से छोड़ने जा रहा था कि मैंने दीपाली को अपनी कार की तरफ़ तेजी के साथ आते हुए देखा तो डर के मारे मेरा हलक खुश्क हो गया। मम्मी पापा कार में बैठ ही चुके थे सो मैंने झट से कार आगे बढ़ा दी। हालांकि मम्मी ने कहा भी कि दीपाली हमारी तरफ़ ही आ रही है कहीं कोई ज़रूरी काम ना हो, पर मैंने सुना अनसुना कर दिया और गाड़ी को तेजी के साथ ले गया।

मैंने मन ही मन सोचा कि जान बची तो लाखों पाये और लौट कर बुद्धू घर को आये। जब मैं पापा मम्मी को छोड़ कर वापिस घर आया तो देखा कि वो हमारे गेट पर ही खड़ी है, जैसे ही मैंने कार रोकी, वो भाग कर कार के पास आ गई और मेरे से बोली कि कार को भगा कर ले जाने की कोशिश ना करना वरना बहुत ही बुरा होगा।

मैं बहुत बुरी तरह से डर गया और हकलाते हुये कहा- जीजी मैं कहाँ भागा जा रहा हूँ और मेरी इतनी हिम्मत ही कहाँ है कि जो मैं आप से भाग सकूँ?

इस पर दीपाली ने कहा- अभी जब तूने मुझे देखा था तब तो जल्दी से भाग गया था और अब बात बना रहा है।

मैंने कहा- जीजी, मुझ को कार को एक तरफ़ तो लगाने दो और फिर अंदर बैठ कर बात करते हैं।

वो बोली- ठीक है !

मैंने कार को एक तरफ़ लगा दिया और दीपाली के साथ अंदर अपने घर में चला गया। मैंने अपने कमरे में जाते ही ए सी ओन कर दिया क्योंकि घबराहट के मारे मुझे पसीना आ रहा था। फिर मैं अपने होंठों पर जबरदस्ती हल्की सी मुस्कान ला कर बोला- आओ जीजी बैठ जाओ और बोलो कि क्या कहना है। और ऐसा कहते-2 मैं रूआंसा हो गया।

वो बोली- डर मत ! मैं तुझको मारुंगी या डाँटूंगी नहीं ! मैं तो यह कहने आई हूँ कि तू उस दिन छत से क्या देख रहा था?

तो मैं अनजान सा बनने लगा और कहा- जीजी आप कब की बात कर रही हैं, मुझे तो कुछ ध्यान नहीं है।

तो उन्होंने हल्का सा मुसकरा कर कहा- साले बनता है ! अभी इतवार को सुबह छत से मुझे नंगा नहीं देख रहा था?

मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो बोली- क्या किसी जवान लड़की को इस तरह नंगा देखना अच्छा लगता है? शरम नहीं आती?

तो मैंने कहा- जीजी आप हो ही इतनी खूबसूरत कि आपको उस रोज नंगा देखा तो मैं आँखें ही नहीं फेर सका और मैं आपको देखता ही रहा। वैसे मैं बड़ा ही शरीफ़ लड़का हूँ और आप को ही पहली बार मैंने नंगा देखा है।

तो वो हंस कर बोली- हाँ-हाँ ! वो तो दिखाई ही देय रहा है कि तू कितना शरीफ़ लड़का है जो जवान लड़कियों को नंगा देखता फिरता है।

मैंने भी झट से कहा- जीजी उस रोज आप टांगों के बीच बालों को बार-बार क्यों रगड़ रही थी तो इस पर वो शरमा गई और बोली- धत्त ! कहीं जवान लड़कियों से ऐसी बात पूछी जाती है !

तो मैंने पूछा- फिर किससे पूछी जाती है?

तो उसने इतना ही कहा- मुझे नहीं मालूम !

अब मैं समझ गया था कि वो उस रोज देखने से ज्यादा नाराज़ नहीं थी। उस समय तक मेरा डर काफ़ी हद तक कम हो गया था और मेरा लण्ड खड़ा होना शुरु हो गया था।

मुझे फिर मस्ती सूझी और मैंने फिर से दीपाली से पूछा- जीजी बताओ ना कि तुम उस रोज क्या कर रही थी?

यह सुन कर वो पहले तो मुस्कुराती रही और फिर एकदम से बोली- क्या तू मुझे फिर से नंगा देखना चाहेगा?

मेरा दिल बहुत जोरों से धड़कने लगा और मैंने हल्के से कहा- हाँ जीजी ! मैं फिर से आपको नंगा देखना चाहता हूँ।

तो वो बोली- क्या कभी तूने पहले भी यह काम किया है?

मैंने कहा- नहीं !

तो उसने कहा- आ मेरे पास ! आज मैं तुझको सबकुछ सिखाऊंगी और यह कह कर उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और मेरे होंट चूमने लगी। मैंने भी उसको कस कर पकड़ लिया और उसके होंठ चूमने लगा। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी तो मैंने अपना मुँह खोल कर उसकी जीभ चूसनी शुरु कर दी। इधर मेरा लण्ड भी चोट खाये काले नाग की तरह फ़नफ़ना रहा था और पैंट में से बाहर आने के लिये मचल रहा था। मैंने एक हाथ बढ़ा कर दीपाली की तनी हुई चूची पर रख दिया और बड़ी बेताबी के साथ उसको मसलने लगा। दीपाली का सारा शरीर एक भट्टी की तरह तप रहा था और हमारी गरम सांसें एक दूसरे की सांसों से टकरा रही थी। ऐसा लग रहा था कि मैं बादलों में उड़ा जा रहा हूँ। अब मेरे से सबर नहीं हो रहा था। मैंने उसकी चूची मसलते हुये अपना दूसरा हाथ उसके चूतड़ों पर रख दिया और उनको बहुत बुरी तरह मसलने लगा।

दीपाली के मुँह से हल्की सी कराहने की आवाज निकली- ओह्हह्हह्ह।।।।।अयीईई।।। और बोली- जरा आराम से मसलो ! मैं कोई भागी नहीं जा रही हूँ, जोर से मसलने पर दर्द होता है।

लेकिन मैं अपनी धुन में ही उसके चूतड़ मसलता रहा और वोह ओह्हह्हह्ह।।।।।।।।।।। अययययीए।।।।। करती रही।

यह आवाजें सुन कर मेरा लण्ड बेताब हो रहा था और पैन्ट के अंदर से ही उसकी नाभि के आस पास टक्कर मार रहा था। मैंने उसके कान में फ़ुसाफ़ुसाते हुये कहा- अपनी सलवार कमीज़ उतार दो !

तो पहले तो वो मना करने लगी लेकिन जब मैंने उसकी कमीज़ ऊपर को उठानी शुरु की तो उसने कहा- रुको बाबा ! तुम तो मेरे बटन ही तोड़ दोगे ! मैं ही उतार देती हूँ !

और यह कह कर उसने अपनी कमीज़ के बटन खोल कर अपनी कमीज़ उतार दी। अब वोह सिरफ़ सफ़ेद ब्रा और सलवार में खड़ी थी। मैं उसको देखता ही रह गया। उसकी बगल में एक भी बाल नहीं था, शायद रविवार को ही बगल के भी बाल साफ़ किये थे। मैंने अपना दहिना हाथ उठा कर उसकी बाईं वाली चूची पर रख दिया और ब्रा के ऊपर से दबाने लगा और दूसरे हाथ को मैं उसकी गाण्ड पर फिरा रहा था।

दीपाली का चेहरा लाल सुर्ख हो गया था और उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी- अह्हह्ह।।।। अह्हह्ह।।।।। ओह्हह्ह।।।।

इस समय मेरे दोनों हाथ उसकी चूची और गाण्ड मसलने में व्यस्त थे और होंठ उसके होंठो को चूस रहे थे। मैंने उसको पलंग पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर के नीचे हाथ लेजा कर सर को ऊपर उठाया और उसके होंठ चूसने लगा।

मैं इतना जोश में था कि कई बार उसने कहा- जरा आहिस्ता चूसो मेरा दम घुटता है।

कई बार तो एक दूसरे के होंठ चूसते-2 हम दोनों के मुँह से गूऊ।।।।।।न।।।।।।।।।।गू की आवाज निकल जाती।

अब मै पीछे से उसकी ब्रा का हूक खोलने लगा था और थोड़ी सी मेहनत के बाद उसे भी खोल दिया और हूक खुलते ही उसकी चूचियाँ एकदम से ऊपर को उछली मानो उनको जबरदस्ती दबा कर कैद किया गया था और अब उनको आज़ादी मिल गई हो। उसकी चूचियाँ बहुत ही गोरी चिट्टी और एकदम सख्त और तनी हुई थी। निप्पल बाहर को उठे हुये और एक दम तने हुये थे।

जैसे ही मैंने एक हाथ से उसकी चूची मसलनी शुरु की और दूसरी को अपने मुँह से चूसने लगा तो दीपली की हालत खराब हो गई और वोह जोर से कसमसाने लगी। अब उसके मुँह से स्ससीईई।।।।।। अह्हह्हह्हह्हह।।।।।।ओह्हह्हह्हह्ह मीएर्रर्रर्रि माआआआआअ मर्रर्रर्र गयीईई रीईई जैसी आवाज निकलने लगी। इधर मेरा लण्ड अभी तक पैन्ट में ही कैद था और उछल-कूद कर रहा था और उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर टक्कर मार रहा था। अब मैंने मुँह से उसकी चूची चूसते हुये और एक हाथ से चूची मसलते हुये दूसरे हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसने भी कोई देर नहीं की तथा अपनी गाण्ड ऊपर कर के मुझे अपनी सलवार उतारने में मदद कर दी।

अब वोह सिरफ़ पैन्टी में ही थी और उसने सफ़ेद रंग की ही पैन्टी पहन रखी थी जो कि चूत के ऊपर से कुछ गीली हो रही थी। लगता था कि उसकी चूत ने उत्तेजना के कारण पानी छोड़ना शुरु कर दिया था।

जैसे ही मैंने उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से सहलाना शुरु किया तो वो काम्पने सी लगी और मस्ती में आकर बोली- मुझको तो नंगी कर दिया है और मेरा सब कुछ देख लिया है, लेकिन तुम अपना लण्ड अभी तक पैन्ट में छुपाये हुये हो !

यह कह कर उसने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल दी और चूंकि मैं पैन्ट के नीचे या वैसे अण्डरवीयर नहीं पहनता हूँ, मेरा लण्ड एकदम फ़नफ़नाता हुआ बाहर निकल आया। मेरा लण्ड देखते ही दीपाली एकदम मस्त हो गई और बोली- हाय राम ! तुम्हारा लण्ड तो काफ़ी लम्बा और मोटा है, लगभग 8 इंच लम्बा होगा और 3 इंच मोटा होगा। वाह ! तुम्हारे साथ तो बहुत ही मज़ा आयेगा। मैं तो तुम्हें अभी तक बच्चा ही समझती थी मगर तुम तो एकदम जवान हो ! एक खूबसूरत लण्ड के मालिक हो और बहुत अच्छी तरह से चोदने की ताकत रखते हो।

अब उसने मेरे सारे कपड़े एक एक करके उतार दिये और मेरे तने हुए लण्ड को सहलाने लगी। मेरे लण्ड का सुपारा एकदम से लाल हो रहा था और काफ़ी गरम था। अब मैंने भी उसकी चूत पर से उसकी पैन्टी उतार दी और देखा कि आज उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं है और एकदम सफ़ाचट है।

मैंने कहा- जीजी, उस रोज तो तुम्हारी चूत पर बहुत झान्टे थी और आज एकदम साफ़ है और किसी हीरे की तरह चमक रही है तो वो हंस पड़ी और बोली- मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ जो अपनी झान्ट और बगल का जंगल साफ़ ना करे। यह मुझको अच्छा नहीं लगता और तुम भी यह सब साफ़ करा करो।

मैंने कहा- जीजी, मैंने तो आज तक अपनी झान्ट और बगल के बाल साफ़ ही नहीं किये है और मुझे डर लगता है कि कहीं ब्लेड से कट ना जाये !

तो वो खिलखिला पड़ी और फिर बोली- अगर ऐसी बात है तो बगल के बाल और लण्ड से झान्ट मैं शेव कर दूंगी और हाँ एक बात और है कि अब तू मुझे बार बार जीजी ना कहा कर। अब मैं तेरी जीजी नहीं रही हूँ, तेरी माशूका हो गई हूँ इसलिये अब तू मुझको परिया कहा कर।

मैंने कहा- अच्छा !

यह कह कर मैंने एक उंगली उसकी चूत के छेद में डल दी, छेद काफ़ी गीला था और एकदम चिकना हो रहा था। उसकी चूत एक दम गुलाबी थी पानी निकलने के कारण काफ़ी चिकनाहट थी। मैंने उसकी चूत में उंगली अंदर बाहर करनी शुरु कर दी और कभी कभी मैं उंगलियों के बीच उसके दाने को भी मसल देता था। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी- ह आह्ह्ह।।।। आह्हह्ह।।।। हय ईई ईई हैईईईइ उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ उफ़्फ़फ़ कर रही थी और कह रही थी कि जरा जोर से उंगली को अंदर बाहर कर और मैं और तेजी के साथ करने लगा। उसके मुँह से सिसकारियों की आवाज बढ़ती ही जा रही थी और वो लगातार उफ़फ़्फ़फ़्फ़फ़फ़।।।।।उफ़्फ़फ़्फ़फ़।।।।ओह्हह्हह।।। ।ह्हह्हह् हाय मर गई ! कर रही थी तभी वो अपनी कमर तेजी के साथ हिलाने लगी और अटक अटक कर बोली- हा आ ऽऽ आ आ आ।।।।।। और्रर्रर्रर्रर्र तेज्जज्जज्जज से अंदर बाहर करो हाय ईईई मेर्रर्रर्रर्रर्रर्ररा निकलाआआआआ निकलाआआआआअ कह कर शान्त सी हो गई और मैंने देखा कि उसकी चूत में से पानी निकल रहा था जिससे चादर गीली हो गई थी।

मैंने कहा- जीजी आपका तो निकल गया !

हाँ मैं झड़ गई हूँ ! और फिर थोड़ा दिखावटी गुस्से से बोली- मैंने अभी क्या कहा था, भूल गया कि तू मुझको अब नहीं बल्कि परिया कह कर बुलाया कर ! और तू फिर भी जीजी ही किये जा रहा है !

मैंने कहा- सॉरी जीजी ।।। उफ़ नहीं परिया ! कुछ देर हम ऐसे ही मज़ा लूटते रहे और इस बीच वो एक बार और झड़ चुकी थी। वो अभी तक मेरा लौड़ा सहला रही थी अब मेरी बरदाश्त से बाहर हो रहा था। वो भी कहने लगी- विक्की और मत तड़पाओ और अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल भी दो।

यह सुन कर मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और उसकी गाण्ड के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे उसकी चूत ऊपर को उठ गई। अब मैंने उसकी टांगों को चौड़ा करके घुटनों से मोड़ कर ऊपर को उठाया और अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर रखा तो मुझे लगा कि मैंने लण्ड किसी भट्टी पर रख दिया, उसकी चूत इतनी गरम थी और भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने अपनी कमर को उठा कर एक धक्का मारा और मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया और इसके बाद मैंने एक बहुत जोरदार धक्का लगाया जिससे 5-6 इंच तक मेरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया और उसके मुँह से एक सिसकी निकली और बोली कि तू तो बड़ा बेदरदी है जो एक ही धक्के में अपने लण्ड को मेरी चूत में घुसाना चाहता है ! अरे मेरी चूत फ़ाड़ने का इरादा है क्या ? ज़रा आराम से कर ! तेरा लण्ड बड़ा है ना इसलिये दर्द होता है।

लेकिन मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी और एक और धक्का तेजी के साथ लगा दिया और अब सारा का सारा लण्ड उसकी चूत में घुस गया था। वोह हल्की सी आवाज में चिल्लाई- हय य ययययी अर्रर्ररे मर गई ऊऊऊ मेर्रर्रररि म्मम्ममआआआअ मेर्रर्रर्रर्रररीईईई चूऊऊत फाआआआआआआड़ दीईई !

और मैं एकदम डर गया कि कुछ गड़बड़ ना हो गई हो और पूछा कि ज्यादा दर्द हो रहा हो तो मैं निकाल लूँ !

वो बोली- अरे नहीं ज्यादा तो नहीं मगर तूने एकदम अंदर कर दिया है इसलिये थोड़ा सा दर्द हो रहा है, तेरा लण्ड काफ़ी लम्बा और मोटा है ना इसलिये !

अब तू मेरे ऊपर लेट जा और चूची चूस !

और मैंने ऐसे ही किया और उसकी चूची चूसने और मसलने लगा। कुछ देर में ही उसे मज़ा आने लगा और अपनी गाण्ड हिला हिला कर ऊपर को उठने लगी और बोली- अब धक्के लगा ! और मैंने अपनी कमर और चूतड़ उठा उठा कर जोर शोर से धक्के मारने शुरु कर दिये। थोड़ी ही देर में उसके मुँह से अन्ट शन्ट आवाजें निकलने लगी। वो बोल रही थी- अयययीईए । र्रर्रे स्सह्हूओद्दद्द मूऊउझे जूओर जोऽऽर से चोद फाआअड़ दे मेर्रर्रीईइ चूऽऽऽत कोऽऽ उफ़्फ़फ़फ़्फ़फ़ मेर्रर्रर्रा फह्हह्हहिर्रर्रर से निकलने वलाआआआआअ है हाअ और जोऽऽर से और यह कर कर तेजी से कमर हिलने लगी और स्सस्सीईईईइस्सस्सस्सीईई करती हुई झड़ गई।

मेरा लण्ड एकदम गीला हो गया था और काफ़ी चिकना हो गया था जिससे वो 2-3 बार बाहर भी निकल गया। अब मैंने धक्के लगने की गति तेज कर दी थी। मुझको थोड़ी मस्ती सूझी और मैंने धक्के लगाते-2 एक उंगली पर उसका पानी लगाया और अचानक उसकी गाण्ड के सुराख पर फेरते हुये मैंने उंगली को उसकी गाण्ड के अंदर कर दिया और वो एकदम दर्द से चीख उठी और बोली- क्या शैतानी कर रहा है? अरे मेरे को दर्द होता है, मेरी गाण्ड से उंगली को फ़ौरन बाहर निकालो।

मैंने पूछा- क्या कभी किसी से गाण्ड मरवाई है? मैं तुम्हारी गाण्ड मारना चाहता हूँ।

इस पर दीपाली ने कहा- नहीं ! मैंने अपनी गाण्ड कभी नहीं मरवाई है और ना ही मेरे से मरवाएगी क्योंकि वो गाण्ड मारने को सही नहीं मानती !

फिर उसने पलट कर पूछा- क्या तुमने किसी से अपनी गाण्ड मरवाई है या किसी की गाण्ड मारी है !

तो मैंने नहीं में जवाब दिया।

इस पर उसने कहा- विक्की तू तो बहुत ही सुंदर और स्मार्ट है, तुझे कैसे छोड़ दिया? क्योंकि लड़के आपस में एक दूसरे की गाण्ड ही मार कर काम चलाते हैं।

मैंने कहा- मैं सेक्सी ज़रूर हूँ लेकिन मैं ना तो किसी लड़के की गाण्ड मारता हूँ और ना ही मरवाता हूँ, मैं तो बस चूत ही चोदना चाहता हूँ। हाँ आज तुम्हारी गाण्ड पर दिल आ गया है इस लिये मारना चाहता हूँ। दीपाली बोली- अभी तक तो मैंने गाण्ड कभी नहीं मरवाई है, यदि कभी मरवाने की इच्छा हुई तो तुझसे ही मरवाउंगी।

हम बातें कर ही रहे थे कि वो फिर से अन्ट-शन्ट बकने लगी- ह्हह्हाआआ और जोर से माआअर्रर्रर निकाल दे म्ममेर्ररा स्सस्सस्सस्ससाआआर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्रा पानीऽऽ आअज्जज्जज्ज ज्जज्ज बना दे मेरी चूह्हह्हह्हह्हहूऊऊत की चटन्नन्नन्नीईई उफ़्फ़ उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ ह्हह्हा आअ !

वो ऐसे ही करती रही और इधर मेरे भी धक्कों की रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी और मैं पसीने-2 हो रहा था अब मेरे मुँह से भी अन्ट-शन्ट निकलने लगा= ह्हह्हाआअ कयूऊं नहीं मैं आज ही तुम्हारी चूत को चोद कर भोसड़ा बना देता हूँ हाय ! मेरा अनेययययययी लगा हैईईईईई लगता है कि निकलने वाला है उफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ और लूऊऊओ और लूऊऊऊऊऊऊऊऊ कहते हुए फ़ुल स्पीड से धक्के मार रहा था कि लगा कि मेरे लण्ड से कुछ बाहर आ रहा है और मैंने हांफ़ते हुए उसे कस कर पकड़ लिया और जोर जोर से उसकी चूची चूसने लगा। उधर दीपाली भी आवाजें निकाल रही थी- हाआ ऐईईईईईईईइ मैईईईई फिर्रर्रर सेयययययी झर्रर्रर्रर्रर्रर रहीईईईई हूँ्न ऊऊओ मेरि माआआआआआआआ मेर्रर्रर्रराआआआआआ निकल रहा है ! और यह कहते -2 उसका सारा शरीर एक बार फिर से अकड़ गया और वो भी मेरे साथ साथ झड़ गई।

उसने झड़ते हुये अपने दांत मेरे कंधे में गड़ा दिये और मेरे मुँह से एक चीख निकल गई और वोह जोर से हंस पड़ी। मैं काफ़ी देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा। फिर हम दोनों उठकर बाथरूम में गये तो उसने मुझे बाहर जाने के लिये कहा पर मैंने मना कर दिया और कहा- परिया मैं तो यहीं रहूँगा और तुमको पेशाब करते हुये देखूंगा !

पहले तो वो मना करती रही लेकिन वो फिर मन गई और मेरे सामने बैठकर पेशाब करने लगी। मैं यह तो नहीं जान पाया कि उसका पेशाब चूत में से कहाँ से निकल रहा है लेकिन उसको पेशाब करते हुये देख कर अच्छा बहुत लगा। उसके पेशाब की धार उसकी चूत से काफ़ी मोटी बाहर आ रही थी और ऊपर को उठती हुई काफ़ी दूर पड़ रही थी और दीपाली मेरी तरफ़ देख कर शर्मीली हंसी हंस रही थी।

फिर मैंने पेशाब किया तो उसने भी मुझे बड़े गौर से देखा। मेरी भी धार काफ़ी मोटी थी और काफ़ी दूर तक जा रही थी। इसी बीच हम दोबारा उत्तेजित होने शुरु हो गये और हम लोगों ने एक बार फ़िर से चुदाई की। हम काफ़ी देर तक यूँ ही चिपटे हुये नंगे पड़े रहे और बात करते रहे। मेरा मन तो उसको एक बार फ़िर से चोदने को कर रहा था लेकिन दीपाली ने ही मना कर दिया और कहा- ज्यादा चुदाई नहीं करनी चाहिये वरना कमजोरी आ जायेगी। मैंने भी उसकी बात मान ली और अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गये और फ़िर दूसरे मौके की तलाश में रहने लगे।
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Marathi sex stories मराठी प्रणय कथा

September 11, 2016 Add Comment
Marathi sex stories मराठी प्रणय कथा

Marathi sex stories मराठी प्रणय कथा
मित्रांनो, मी दहावीत शिकत असतानाची ही गोष्ट. आमच्या गल्लीमध्ये माझ्या घराच्या पुढे चार घरे सोडून शोभाताई रहायची. तिचे शिक्षण पूर्ण झाले होते. व ती घरीच असायची. तिची आई कामाला जायची. व तिचे बाबा कामानिमित्त बाहेरगावी असायचे. तिचा भाऊ इंजिनीअरिंग करीत होता व तो होस्टेलवर रहायचा. दिवसभर शोभाताई घरी एकटीच असायची. तिचे व माझ्या आईचे खुप जमायचे. ती सतत आमच्या घरी यायची. माझ्या आईला ती कामात मदत करायची. आईला ती काकू म्हणायची. माझा लहान भाऊ खुप वात्रट होता. म्हणून आईने तिला त्यांच्या घरी माझा अभ्यास घेण्याची विनंती केली. ती पण हो म्हणाली.
मग मी रोज तिच्याकडे जाऊ लागलो. ती खुपच छान अभ्यास घ्यायची. ती शिकवताना कधी रागवायची नाही. खुप समजुन सांगायची. मला लगेच समजायचे. मग मी दहावीची परीक्षा दिली.सर्व पेपर खुपच छान गेले. मी रोज शोभाताईकड़े जायचो. संध्याकाळी मात्र मी मित्रांकडे जायचो. आम्ही सर्व जमलो की पोरींची टवाळी करू लागलो होतो. पोरिंविशयी मला खुप आकर्षण वाटु लागले होते. पण साला एक पोरगी पटेल तर शप्पत. एखाद्या मुलीचे मोठे गोळे बघितले की आमचा बाबुराव खाडकन जागा व्हायचा. मग मात्र त्याला शांत करता करता नाकि नऊ यायचे.

शोभाताई दिसायला खुप सुन्दर होती. ती साधारणपणे २० वर्षाची असावी. गोरी गोरीपाण सुन्दर नयन, नाक थोड़े छोटेसे होते पण तिचे ओठ नाजुक व गुलाबी होते. ती उंच होती पण थोडीशी जाड होती.केस काळेभोर व तिच्या नितंबाना स्पर्श करीत होते. वक्ष मोठे व उभारदार होते.ती घरात नेहमी परकर व पोलका घालायची. तिचे नितम्ब खुपच सुन्दर व कड़क होते. तिची त्वचा खुपच मुलायम होती. ती खुपच मादक व खळखळउन हसायची. तिचे बोलने खुपच गोंड होते. मला ती खुप आवडायची.मात्र माझ्या मनात कधीही तिच्या बद्दल वाईट विचार आले नव्हते.

एक दिवस मी असाच कोपऱ्यावर उभा राहून टवाळकी करीत होतो आणि तेवढ्यात शोभाताई तिथे दुकानात काहीतरी घेण्यासाठी आली होती. माझे अचानक तिच्याकडे लक्ष गेले. मी खुप घाबरलो. पुरता भेदरून गेलो होतो मी. मला काहीच सुचेना. म्हटले, बोम्बला, आपली काही खैर नाही आता. मी शोभाताई जवळ गेलो ती नाक फेंदारून रागाने माझ्याकडे पाहत निघून गेली. मी मग थोडासा धीर एकवटून तिच्या मागे गेलो. ती माझ्याच घरात घुसली.गोट्या कपाळात जाने म्हणजे काय ते मला आत्ता समजले. तसाच मनाचा हिय्या करून घरात घुसलो. तिने माझ्या आई जवळ सामान व पैसे दिले आणि ती जाऊ लागली. मी तिला घराबाहेर जाऊ दिले मग तिच्या मागे गेलो आणि तिच्याशी बोलण्याकरीता तिला थांबवू लागलो, पण ती मला भिक घालायला तयार नव्हती. मी हिरमुसला होउन तिथून निघालो. माझे कशातच लक्ष लागत नव्हते. संध्याकाळी मी परत मित्रांकडे गेलो. पण तिथेही माझे मन रमेना. रम्याने मला विचारले, काय झालय रे तुला. मी त्याला सर्व परिस्थिति सांगितली. तर तो म्हणाला, अरे सोड रे, ती तरी कुठे साजुक आहे. ती नाही का सुरेशदादाला चढवून घेत. काय? मी जवळ जवळ किंचाळलोच. तो म्हणाला खरेच बोलतोय मी , हवे तर संजाला विचार. संजाने पण मान डोलावली. मला खुप राग आला होता. मी तिथून तड़क घरी आलो. शोभाताईबद्दल कुणी असे काही बोलले तर मला ते आवडत नव्हते. शोभाताई रोज आमच्या घरी यायची पण माझ्याशी ती बोलत नव्हती.

मग तो दिवस उजाडला. त्या दिवशी माझा रिझल्ट होता. माझे बाबा घरी नव्हते म्हणून मी व माझी आई शाळेत गेलो. मला ८९% पडले होते. आई खुप खुश झाली. मग आम्ही येताना वाटेत थांबुन पेढे घेतले आणि घराकडे निघालो. रस्त्यात माझा एक मित्र भेटला. मी आईला सांगुन त्याच्याजवळ थांबलो. आईने लवकर घरी येण्यासाठी बजावले. मी हो म्हणालो. थोडा वेळ त्याच्याबरोबर टाइमपास केला आणि घरी आलो. घरी आल्यावर आईने तोंडहातपाय धुवून देवा जवळ पेढा ठेवायला सांगितला. देवाजवळ पेढा ठेवल्यावर आईने एक पेढा मला भरविला व स्वत एक पेढा खाल्ला अन मला म्हणाली जा पहिला जावून शोभाताईला पेढे देऊन ये. मी गप्प झालो व तिथेच घुटमळत राहिलो. आई म्हणाली, अरे जा ना. मी म्हणालो, आई ती माझ्यावर चिडली आहे. ती माझ्याशी बोलत नाही. तर आई पटकन म्हणाली, अरे जा काही नाही होत. तूच काहीतरी वात्रटपना केला असशील. ती मोठी आहे ना तुझ्यापेक्षा. तिनेच तुझा अभ्यास घेतलाना. जा तिला पेढा पण दे आणि तिची माफ़ी पण माग. मला माहित आहे तिचा स्वभाव. ती कधी कुणावर चिडत नाही. आईने असे म्हनल्यावर मला खुप बरे वाटले. मी तड़क तिच्या घरी गेलो. दरवाजा बंद होता, म्हणून मी थोडासा लोटला तर तो उघडला मी मनाचा हिय्या करून आत गेलो. शोभाताई पलंगावर ओणवी होउन कसले तरी पुस्तक वाचत होती. मी हळूच तिला हाक मारली व म्हणालो शोभाताई, मला ८९% पडले. तिने पटकन ते पुस्तक उशीखाली ठेवले आणि माझ्याकडे पाहत उठली आणि मला मीठी मारली. व म्हणाली, ग्रेट मला माहित होते की तुला खुप चांगले मार्क्स मिळणार. असे म्हणून तिने माझी पप्पी घेतली व म्हणाली आधी पेढे दे. मी पुडा तिच्यासमोर धरला. तिने त्यातून एक पेढा काढून मला भरविला. पेढा खाताना मी तिला म्हणालो अग तू पण खा ना. तर ती म्हणाली मी तुला पेढा भरविला आता तू मला भरव. मी तिला पेढा भरवला.पेढा खातखात ती म्हणाली बंटी मला आज खुप आनंद झालाय, तू अगदी माझ्या अपेक्षेप्रमाने मार्क्स मिळविलेस. सांग तुला काय गिफ्ट हवय. मी म्हणालो काही पण तुला आवडेल ते दे. तिचा मूड बघून मी पटकन तिला म्हणालो, शोभाताई सॉरी, मी त्या दिवशी चुकलो, मी परत नाही असे करणार. तिने परत मला जवळ ओढले आणि माझ्या गालाची पप्पी घेत म्हणाली, मला माहित आहे तू असा नाहीस पण कुठल्याही मित्रांच्या नादाने तू काही चुकीचे करावे असे मला नाही वाटत. तिचे उरोज माझ्या हनुवटी आणि ग़ळ्याला स्पर्श करीत होते. तिचा तो उबदार स्पर्श मला मोहुन टाकित होता. मी ही तिला बिलगलो. बंटी, अरे असे छेडून मुली पटत नसतात. मी म्हणालो, माझा तस हेतु नव्हता. ती हसून म्हणाली अरे तुझ्या वयात मुलींबद्दल आकर्षण निर्माण होने हे काही नवीन नाही. मुली पटवन्याचे अनेक मार्ग आहेत. मी तुला शिकवल मुलींना कसे पटवायचे ते. आणि मला विचारले तुला कशा मुली आवडतात? मी म्हणालो की स्वभावाने छान आणि दिसायला सुन्दर. तिने थोडा विचार केला आणि म्हणाली सुन्दर म्हणजे कुनासारखी? मी म्हणालो तुझ्यासारखी खुप सुन्दर नसेल तरी चालेल. तिने परत मला मीठी मारली अणि विचारले मी एवढी सुन्दर आहे का? मी म्हणालो हो प्रश्नच नाही. ती म्हणाली तू माझ्यात काय पाहिले की मी तुला सुन्दर दिसते. मी म्हणालो तुझा गोरा रंग.ती म्हणाली बस गोऱ्या रंगामुळे मी तुला सुन्दर दिसते. मी म्हणालो नाही ग तुझे लांबसड़क काळेभोर रेशमासारखे केस, तुझे टपोरे डोळे, तुझे लाल लाल कान, तुझे गुलाबाच्या पाकळयासारखे ओठ. ती लड़ीवाळपणे मला म्हणाली सांग ना आणखी काय आवडते? तुझा गोंड गळा. ती म्हणाली पुढे बोल ना. आता माझा बाबुराव उठू लागला होता. मी तुझ्या छातीवरचे ते दोन मोठे गोळे म्हणता म्हणता माझे शब्द गिळून म्हणालो शोभाताई तू खुप सुन्दर आहेस. तिने परत माझ्या गालाची पप्पी घेतली. मी घाबरत तिला विचारले शोभाताई मी पण तुझी पप्पी घेऊ का? काही न म्हणता तिने डोळे मिटून घेतले. मग मी धीर एकवटून तिच्या गालाच्या जवळ माझे ओठ नेताना पाहिले तिचे ओठ थरथरत होते. तिच्या सर्वांगावर शहारे आले होते. ते पाहून मी तिच्या ओठांवर माझे ओठ ठेवले. ती काहीच म्हणाली नाही. आता मात्र माझा बांध तुटू लागला. मग मी पहिल्यांदा तिला खुप आवळले आणि तिच्यावर माझ्या मुक्यांचा वर्षाव करू लागलो. ती पण मला प्रतिसाद देत होती. माझे हाथ तिच्या मानेवर गेले होते. मग मी तिच्या तोंडात तोंड घालून तिचा मुका घेत होतो. आम्हाला दोघानाही सर्व जगाचा विसर पडला होता. तिचे मुलायम हाथ एव्हाना माझ्या शर्टमध्ये घुसले होते. ती हळूवारपणे तिचा मुलायम हात माझ्या छातीवर फिरवित होती. मग मी पण मुका घेत घेत माझा एक हात हळूच तिच्या छातीवर आणला आणि तिच्या एका उरोजाला दाबले. ती हळूच सित्कारली. मी तिच्या पोलक्यावरुनच तिचे गोळे कुस्करत होतो. ती खुप गरम झाली होती. तिने माझ्या शर्टची बटने काढ़ायला सुरवात केली.तिचे कान लालबुंद झाले होते. मी हळूच तिच्या कानाचा चावा घेतला. तशी ती पुन्हा सित्कारली. तिने माझा शर्ट काढला. माझ्या प्यांटीतुन माझ्या लवडयाचा उभार स्पष्ट दिसत होता. ती वरुनच माझ्या लवडयाला कूरवाळू लागली. कुरवाळत असताना तिने मला हलकेच ढकलत पलंगाकडे सरकावले. मी पलंगावर पडलो आणि ती माझ्या अंगावर पडली. मी परत तिचा मुका घेतला व तिच्या पोलक्याची बटने काढू लागलो. तिची सर्व बटने मी पटापट काढली व तिचा पोलका बाजूला केला. तिने सफ़ेद ब्रा परिधान केली होती. तिचे ते सुन्दर गोरेपान शरीर बघून मी वेडा झालो. मी तिचे दोन्ही स्तन तसेच कूरवाळू लागलो. मग मी तिला माझ्या जवळ ओढले व तिची ब्रा काढू लागलो पण मला काही जमेना. मग मी तिला ब्रा काढायला सांगितली. ती उठली आणि माझ्याकडे पाहून हसली. मला कळेना ती का हसली, पण लगेच मला उमगले की तिच्या ब्रा चे हुक पुढेच होते. तिने हुक काढताच तिची दोन्ही कबूतरे मोकळी झाली. केवढे मोठे स्तन होते तिचे. त्याच्या अग्रभागी गुलाबी रंगाची तिची कड़क बोंडे त्या गोऱ्या स्तनांचा आकर्षकपणा वाढवित होती. तिच्या स्तनांवर हिरव्या रंगाच्या नसा फुगून स्तनान्मध्ये ताठरपना आला होता. मग मी हळूच तिचा एक स्तन तोंडात घेतला आणि त्याला चोखू लागलो. तशी शोभाताई खुपच वेडीपीशी झाली. मग तिने माझी चेन काढून आत हात घातला. माझा लवडा ती दाबू लागली. माझ्या मस्तकातुन एक जोराची कळ निघाली. आज पहिल्यांदाच कोणीतरी माझ्या लवड्याला हात लावला होता. मला खुप बरे वाटत होते. तिने माझ्या प्यांट चे बटन काढले व माजी प्यांट ती हळूहळू काढू लागली. माझी जींस असल्याने ती खाली सरकवताना माझी अंडरविअरपण थोड़ी खाली सरकली आणि माझा लंड त्यातून थोडा बाहेर आला. शोभाताई ने हे पाहताच माझ्या अंडरविअरमध्ये हात घालून खाली सरकवली व माझा ताठलेला लवडा हातात घेउन त्याच्याशी खेळू लागली. मला असे वाटु लागले की आता माझ्या लवडयातुन काहीतरी बाहेर पडणार मी तिला लगेच थाम्बवले. तिने विचारले काय झाले. मी म्हणालो मला असे वाटतय कि आता माझा चिक बाहेर पडतोय. ती म्हणाली," मग तू आता कर ना." मी म्हणालो," ठीक आहे." मग ती पलंगावर आडवी झाली. मी तिच्या परकराची नाडी खेचली. मी तिचा परकर खाली ओढू लागलो. परकर खाली खेचताना मला तिची बेम्बी दिसली. तिची बेम्बी खुपच सुन्दर होती असे वाटत होते की त्याची पप्पी घ्यावी पण आता मी कंट्रोल करू शकत नव्हतो. तिचा परकर खाली खेचताच तिच्या गोऱ्या गोऱ्या मांड्या वरची तिची निळ्या रंगाची फुलांची चड्डी दिसू लागली. तिचे शरीर म्हणजे संगमरवरच वाटत होते. आता माझ्या सहनशक्तीचा अंत झाला होता. मी पटकन तिची चड्डी खाली ओढली आणि मला तिची पुच्ची दिसू लागली. काय सुन्दर भूरी पुच्ची होती. तिची काळीभोर आणि मुलायम झाटे बघून मला कधी एकदा माझा लंड तिच्या पुच्चित घालतो असे झाले होते.

मैं लीना और मौसा मौसी Hindi Sexy Stories

September 11, 2016 Add Comment
मैं लीना और मौसा मौसी    Hindi Sexy Stories


http://storieswithmovies.blogspot.in/2016/04/hindi-sexy-stories.html

Rajat chacha aur Gita chachi ko America gaye do mahane bhee nahee hue the aur Leena kee chut kulabulaane lagee. kyaa chudail tabiyat paaee hai meree raanee ne, iseeliye to usapar mein marataa hoon.
"kyon wo deepak mausajee ke baare me bol rahee thee naa Gita chachi! chalanaa nahee hai kyaa unake yahaan?"
"haan jaan, jab kaho chalate hain. waise tumako bataane hee waalaa thaa, aabhaa mausi kaa subaha hee phon aayaa thaa, tuma nahaa rahee thee tab ki Anil bete, gaaon aao bahu ko lekar, hamane to usako dekhaa bhee nahee."
Leena muskaraa kar bolee "tab to aur der mat karo, isako kahate hain sanjog, yahaan hama unakee baat kar rahe the aur unhonne bulaawaa bhej diyaa. kaheen Gita chachi ne to unako nahee bataayaa yahaan hamane kyaa gul khilaaye unake saath"
"kyaa pataa. waise darling, Gita chachi ne bhee bas sanket hee diyaa thaa ki mausa mausi ke yahaan ho aao, usakaa matalab yaha nahee hai ki wahaan bhee waisee hee raas leelaa karane milegee jaisee hamane Rajat chacha aur Gita chachi ke saath kee. aur sach me aabhaa mausi ko lagaa hogaa ki hama unake yahaan gaaon aaylen"
"jo bhee ho, bas chalo. wahaan dekhlenge kyaa hotaa hai" Leena mujhe aankh maar kar bolee.
mein samajh gayaa, wahaan kuch ho na ho, Leena apanee pooree koshish karegee ye mujhe maalooma thaa. "theek hai raanee, agale hee mahane chalate hain. mein rizarveshan kaa dekhataa hoon"
deepak mausajee ke yahaan jaane ke pahale waale din meine Leena ko unake baare me bataayaa. hamaaraa unakaa door kaa rishtaa hai. unakee patnee aabhaa mausi, meree maan ke hee gaaon kee thee. meree maan se unakee umar do teen saal badee thee. yaane ab saintaalees adataalees ke aasapaas hogee.
"par deepak mausajee to chaalees ke neeche hee hain, shaayad chattees saintees saal ke. fir ye kyaa chakkar hai? unakee patnee unase das saal badee hai?" Leena ne poochaa.
"asal me deepak mausajee ke bade bhaaee se aabhaa mausi kee shaadee huee thee. we jawaanee me hee gujar gaye. gaaon me riwaaj hai ki aise me kabhee dewar ke saath shaadee kar dete hain. so aabhaa mausi kee shaadee apane dewar se kar dee gayee. badee majedaar baat hai, jab shaadee huee to mausi thee tees kee aur deepak mausajee bees ke neeche hee the. deepak mausajee apanee bhaabhee par bade fidaa the, jabaki wo badee tej tarraar thee, sunaa hai ki unase jab apanee bhaabhee se shaadee ke liye poochaa gayaa to unhonne turant haan kar dee. log kahate hain ki unakaa pahale se hee lafadaa chalataa thaa, waise gaaon me ye aksar hotaa hai. kh*** shaadee kar lee to achchaa huaa. lafade nahee hue aage. waise deepak mausajee bade fidaa hain aabhaa mausi par, binaa unase pooche koee kaama nahee karate, ekadama joroo ke gulaama hain"
"honaa bhee chaahiye." Leena tunak kar bolee "agar joroo swarg kee s*** karaatee ho to gulaama hee ban kar rahanaa chaahiye usakaa"
"jaisaa mein hoon raanee" mein muskaraa kar bolaa.
Leena ne palak jhapakaa kar kahaa "waise badee tej lagatee hain aabhaa mausi. ab to umara ke saath aur teekhee ho gayee hongee. agar deepak mausajee ko itanaa kaaboo me rakhatee hain to fir wahaan kyaa majaa aayegaa! deepak mausajee ko phansaane kaa koee chaans nahee milegaa mujhe" Leena jaraa naaraaj saa ho kar bolee.
"darling, chaaho to cancel kar dete hain. unake baare me mujhe jyaadaa maalooma nahee hai" meine kahaa.
Leena ek minit sochatee rahee fir bolee "nahee cancel mat karo, Gita mausi jhut nahee bollengee. mujhe aankh maaree thee unhonne jab ye kahaa thaa ki deepak mausajee ke yahaan ho aao. jaroor majaa aayegaa wahaan"
hama tren se deepak mausajee ke gaaon pahoonche. we khud steshan par hame lene aaye. deepak mausajee majhale kad ke charahare badan ke the par badan kasaa huaa thaa. kurataa pajaamaa pahane the. kaafee gore chitte haindasama aadamee the. unake saath me do naukar bhee the, Raghu aur Rajju. unhonne saamaan uthaayaa. donon ekadama jawaan the, kareeb kareeb chokare hee the, bees ikkees ke rahe honge. Raghu charahare badan kaa chikanaa saa naujawaan thaa. Rajju thodxaa pahalawaan kisma kaa oonchaa pooraa gabaroo jawaan thaa.
un sab ko dekhakar Leena kaa mood theek ho gayaa. meree or dekhakar aankh maaree. mein samajh gayaa ki mausajee, Raghu aur Rajju ko dekhakar usakee bur geelee hone lagee hogee. kyaa chudail hai meree Leena! achche mardon ko dekhakar hee usakee choot kulabulaane lagatee hai.
hama ghar pahoonche to aabhaa mausi darawaaje par khadee thee. saath me bees ek saal umra kee ek naukaraanee bhee thee. mausi ne hamaaraa swaagat kiyaa. "aa bahu, bahut achchaa kiyaa ki tuma log aa gaye. mein to kab se kaha rahee thee tere mausajee se ki shaadee me nahee gaye to kama se kama Anil aur bahu ko ghar to bulaao. meine Gita se bhee kahaa thaa jab teen chaar mahane pahale milee thee."
"achchaa, Gita mausi aayee thee kyaa yahaan?" meine poochaa.
"haan, waise wo kaee baar aatee hai, is baar bhee akelee hee aaee thee. hafte bhar rahee. tab tere mausajee Rajju ke saath baahar gaye the, shahar me. Radha aur Raghu yaheen the. ye hai Radha, Raghu kee gharawaalee. Rajju kee bahan hai. Raghu aur Rajju khetee kaa kaama dekhate hain, Radha bitiyaa ghar kaa kaama sambhaalatee hai" mein mausi kee or dekh rahaa thaa. umar ho chalee thee fir bhee mausi achche khaaye piye badan kee thee. safed baalon kee ek do latlen dikhane lagee thee. pooree saadee badan me lapetee thee aur aadhaa ghoonghat bhee liyaa huaa thaa isaliye unake badan kaa andaajaa lagaanaa mushkil thaa. waise kalaaiyaan ekadama goree chikanee thee.
Radha dubale patale charahare badan kee saanwalee chokaree thee, ekadaka teekhee churee. meree or aur Leena kee or najar churaakar dekh rahee thee. hama ghar ke andar aaye to wo rasoee me chalee gayee. jaate wakt peeche se usakee jaraa see cholee me se usakee chikanee saanwalee damakatee huee peeth dikh rahee thee.
hamane chaay pee aur fir mausi boleen "chalo, tuma log nahaa dho lo, fir aaraama karo. shaama ko theek se gapplen karlenge"
रजत चाचा और गीता चाची को अमेरिका गये दो महने भी नहीं हुए थे और लीना की चूत कुलबुलाने लगी. क्या चुदैल तबियत पाई है मेरी रानी ने, इसीलिये तो उसपर मैं मरता हूं.

"क्यों वो दीपक मौसाजी के बारे में बोल रही थीं ना गीता चाची! चलना नहीं है क्या उनके यहां?"

"हां जान, जब कहो चलते हैं. वैसे तुमको बताने ही वाला था, आभा मौसी का सुबह ही फोन आया था, तुम नहा रही थीं तब कि अनिल बेटे, गांव आओ बहू को लेकर, हमने तो उसको देखा भी नहीं."

लीना मुस्करा कर बोली "तब तो और देर मत करो, इसको कहते हैं संजोग, यहां हम उनकी बात कर रहे थे और उन्होंने बुलावा भेज दिया. कहीं गीता चाची ने तो उनको नहीं बताया यहां हमने क्या गुल खिलाये उनके साथ"

"क्या पता. वैसे डार्लिंग, गीता चाची ने भी बस संकेत ही दिया था कि मौसा मौसी के यहां हो आओ, उसका मतलब यह नहीं है कि वहां भी वैसी ही रास लीला करने मिलेगी जैसी हमने रजत चाचा और गीता चाची के साथ की. और सच में आभा मौसी को लगा होगा कि हम उनके यहां गांव आयें"

"जो भी हो, बस चलो. वहां देखेंगे क्या होता है" लीना मुझे आंख मार कर बोली.

मैं समझ गया, वहां कुछ हो न हो, लीना अपनी पूरी कोशिश करेगी ये मुझे मालूम था. "ठीक है रानी, अगले ही महने चलते हैं. मैं रिज़र्वेशन का देखता हूं"

दीपक मौसाजी के यहां जाने के पहले वाले दिन मैंने लीना को उनके बारे में बताया. हमारा उनका दूर का रिश्ता है. उनकी पत्नी आभा मौसी, मेरी मां के ही गांव की थीं. मेरी मां से उनकी उमर दो तीन साल बड़ी थी. याने अब सैंतालीस अड़तालीस के आसपास होगी.

"पर दीपक मौसाजी तो चालीस के नीचे ही हैं, शायद छत्तीस सैंतीस साल के. फ़िर ये क्या चक्कर है? उनकी पत्नी उनसे दस साल बड़ी है?" लीना ने पूछा.

"असल में दीपक मौसाजी के बड़े भाई से आभा मौसी की शादी हुई थी. वे जवानी में ही गुजर गये. गांव में रिवाज है कि ऐसे में कभी देवर के साथ शादी कर देते हैं. सो आभा मौसी की शादी अपने देवर से कर दी गयी. बड़ी मजेदार बात है, जब शादी हुई तो मौसी थीं तीस की और दीपक मौसाजी बीस के नीचे ही थे. दीपक मौसाजी अपनी भाभी पर बड़े फ़िदा थे, जबकि वो बड़ी तेज तर्रार थीं, सुना है कि उनसे जब अपनी भाभी से शादी के लिये पूछा गया तो उन्होंने तुरंत हां कर दी. लोग कहते हैं कि उनका पहले से ही लफ़ड़ा चलता था, वैसे गांव में ये अक्सर होता है. खैर शादी कर ली तो अच्छा हुआ. लफ़ड़े नहीं हुए आगे. वैसे दीपक मौसाजी बड़े फ़िदा हैं आभा मौसी पर, बिना उनसे पूछे कोई काम नहीं करते, एकदम जोरू के गुलाम हैं"

"होना भी चाहिये." लीना तुनक कर बोली "अगर जोरू स्वर्ग की सैर कराती हो तो गुलाम ही बन कर रहना चाहिये उसका"

"जैसा मैं हूं रानी" मैं मुस्करा कर बोला.

लीना ने पलक झपका कर कहा "वैसे बड़ी तेज लगती हैं आभा मौसी. अब तो उमर के साथ और तीखी हो गयी होंगी. अगर दीपक मौसाजी को इतना काबू में रखती हैं तो फ़िर वहां क्या मजा आयेगा! दीपक मौसाजी को फंसाने का कोई चांस नहीं मिलेगा मुझे" लीना जरा नाराज सा हो कर बोली.

"डार्लिंग, चाहो तो कैंसल कर देते हैं. उनके बारे में मुझे ज्यादा मालूम नहीं है" मैंने कहा.

लीना एक मिनिट सोचती रही फ़िर बोली "नहीं कैंसल मत करो, गीता मौसी झूट नहीं बोलेंगी. मुझे आंख मारी थी उन्होंने जब ये कहा था कि दीपक मौसाजी के यहां हो आओ. जरूर मजा आयेगा वहां"

हम ट्रेन से दीपक मौसाजी के गांव पहुंचे. वे खुद स्टेशन पर हमें लेने आये. दीपक मौसाजी मझले कद के छरहरे बदन के थे पर बदन कसा हुआ था. कुरता पजामा पहने थे. काफ़ी गोरे चिट्टे हैंडसम आदमी थे. उनके साथ में दो नौकर भी थे, रघू और रज्जू. उन्होंने सामान उठाया. दोनों एकदम जवान थे, करीब करीब छोकरे ही थे, बीस इक्कीस के रहे होंगे. रघू छरहरे बदन का चिकना सा नौजवान था. रज्जू थोड़ा पहलवान किस्म का ऊंचा पूरा गबरू जवान था.

उन सब को देखकर लीना का मूड ठीक हो गया. मेरी ओर देखकर आंख मारी. मैं समझ गया कि मौसाजी, रघू और रज्जू को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी होगी. क्या चुदैल है मेरी लीना! अच्छे मर्दों को देखकर ही उसकी चूत कुलबुलाने लगती है.

हम घर पहुंचे तो आभा मौसी दरवाजे पर खड़ी थीं. साथ में बीस एक साल उम्र की एक नौकरानी भी थी. मौसी ने हमारा स्वागत किया. "आ बहू, बहुत अच्छा किया कि तुम लोग आ गये. मैं तो कब से कह रही थी तेरे मौसाजी से कि शादी में नहीं गये तो कम से कम अनिल और बहू को घर तो बुलाओ. मैंने गीता से भी कहा था जब तीन चार महने पहले मिली थी."

"अच्छा, गीता मौसी आयी थी क्या यहां?" मैंने पूछा.

"हां, वैसे वो कई बार आती है, इस बार भी अकेली ही आई थी. हफ़्ते भर रही. तब तेरे मौसाजी रज्जू के साथ बाहर गये थे, शहर में. राधा और रघू यहीं थे. ये है राधा, रघू की घरवाली. रज्जू की बहन है. रघू और रज्जू खेती का काम देखते हैं, राधा बिटिया घर का काम संभालती है" मैं मौसी की ओर देख रहा था. उमर हो चली थी फ़िर भी मौसी अच्छे खाये पिये बदन की थीं. सफ़ेद बालों की एक दो लटें दिखने लगी थीं. पूरी साड़ी बदन में लपेटी थी और आधा घूंघट भी लिया हुआ था इसलिये उनके बदन का अंदाजा लगाना मुश्किल था. वैसे कलाइयां एकदम गोरी चिकनी थीं.

राधा दुबले पतले छरहरे बदन की सांवली छोकरी थी, एकदक तीखी छुरी. मेरी ओर और लीना की ओर नजर चुराकर देख रही थी. हम घर के अंदर आये तो वो रसोई में चली गयी. जाते वक्त पीछे से उसकी जरा सी चोली में से उसकी चिकनी सांवली दमकती हुई पीठ दिख रही थी.

हमने चाय पी और फ़िर मौसी बोलीं "चलो, तुम लोग नहा धो लो, फ़िर आराम करो. शाम को ठीक से गप्पें करेंगे" 

हम कमरे में आये तो लीना मुझसे लिपट कर बोली "क्या मस्त माल है डार्लिंग!"

मैंने पूछा "किसकी बात कर रही हो?"

"अरे सबकी, सब एक से एक रसिया हैं. राधा तुमको कैसे देख रही थी, गौर किया? और वो रज्जू और रघू मेरी चूंचियों पर नजर जमाये थे. और तेरे मौसाजी भी बार बार मुझे ऊपर से नीचे तक घूर रहे थे पर मुझे जितना देख रहे थे उतना ही तुम पर उनकी निगाह जमी थी"

"अब तुम जान बूझ कर अपना लो कट ब्लाउज़ पहनकर अपनी चूंचियां दिखाओगी तो और क्या होगा. वैसे तुम ठीक कह रही हो, सब बड़े रसिया किस्म के लगे मुझको, पर मेरे को घूरने का क्या तुक है, पता नहीं क्या बात है"

"अरे आज शाम को ही पता चल जायेगा. मैं जरा भी टाइम वेस्ट नहीं करने वाली. और तुमको घूर रहे थे तो अचरज नहीं है, है ही मेरा सैंया ऐसा चिकना नौजवान" लीना मुस्करा कर मेरे गाल पुचकार कर बोली.

"पर वो आभा मौसी हैं ना, उनके सामने कुछ नहीं करना प्लीज़, जरा संभल कर छुपा कर सबसे ..." मैंने हाथ जोड़कर कहा.

’अरे वो ही तो असली मालकिन हैं यहां की, तुमने गौर नहीं किया कैसे सब उनकी ओर देख रहे थे कि वो क्या कहती हैं. और उनकी उमर के बारे में मैं जो बोली थी वो भूल जाओ. इस उमर में भी मौसी एकदम खालिस माल हैं, यहां जो भी सब चलता होगा, वो उन्हींका किया धरा है, देख लेना, मेरी बात याद रखना"

मैं बोला "अरे ऐसा क्या देखा तुमने, मैं भी तो सुनूं. मुझे तो बस वे सीदी सादी महिला लगीं, साड़ी में पूरा बदन ढका था, सिर पर भी पल्लू ले लिया था. वैसे मैंने बहुत दिन में देखा है उनको, बचपन में एकाध बार मिला था, अब याद भी नहीं है"

"तुमको नहीं पता, मैं जब चाय के कप रखने को अंदर गयी थी तब उनका आंचल सरक गया था. तुम वो मोटे मोटे मम्मे देखते तो वहीं ढेर हो जाते. और वो राधा भी कम नहीं है, तुमको बार बार देख रही थी, लगता है तुम उसको बहुत भा गये हो, चलो, तुमको भी मजा आ जायेगा डार्लिंग" लीना मेरे लंड को सहलाते हुए बोली.

"तुमको कौन पसंद आया मेरी जान? तुमको तो सब मर्द और औरत घूर रहे थे" मैंने लीना के चूतड़ पकड़कर पूछा.

"मुझको तो सब पसंद आये, मैं तो हरेक मिठाई को चखने वाली हूं. पर हां, वो रज्जू काफ़ी मस्त मरद है, लगता है लंड भी अच्छा मतवाला होगा, रजत मौसाजी जैसा" लीना बोली.

"तुमको कैसे मालूम?"

"अरे जब मेरी चूंची को घूर रहा था तब मैंने देखा था. उसकी पैंट फ़ूल गयी थी और ऐसा लग रहा था जैसे पॉकेट में कुछ रखा हो. उसका जरूर इतना लंबा होगा कि उसके पॉकेट के पास तक पहुंचता होगा"

"मैं कुछ चक्कर चलाऊं?" मैंने उसे चूम कर कहा. लीना की मस्ती देखकर मुझे भी मजा आने लगा था. "उन सबके मस्त लंडों का इंतजाम करूं तुम्हारे लिये?"

"हां मेरे राजा, बहुत मजा आयेगा. वैसे तो मुझे लगता है कि कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अपने आप सब शुरू हो जायेगा पर मौका मिले तो रज्जू को जरा इशारा दे कर तो देखो"

हमने नहाया और सफ़र की थकान मिटाने को कुछ देर सो लिये. मेरा मन हो रहा था लीना को चोदने का पर उसने मना कर दिया "अरे मेरे भोले सैंया, बचाकर रखो अपना जोबन, काम आयेगा, और आज ही काम आयेगा, मुझे तो हमेशा चोदते हो, अब यहां स्वाद बदल लेना"

मुझे यकीन नहीं था, कुछ करने का चांस हो तो भी एक दिन तो लगेंगे जुगाड़ को. फ़िर भी लंड को किसी तरह बिठाया और सो गया. शाम को सो कर उठा तो देखा लीना गायब थी. मैं बाहर आया. मौसी के कमरे से बातें करने की आवाज आ रही थी. मैं वहां हो लिया.

मौसी पलंग पर लेटी थीं. कह रही थीं "अब उमर हो गयी है लीना बेटी, मेरे पैर भी शाम को दुखते हैं. राधा दबा देती है, बड़ी अच्छी लड़की है, पता नहीं कहां गयी है"

"कोई बात नहीं मौसी, लाइये मैं दबा देती हूं" कहकर लीना मौसी के पैर दबाने लगी. मौसी मुझसे बोली "अरे अन्नू, मुझे लगता था कि तेरी ये बहू एकदम मुंहफ़ट होगी, शहर की लड़कियों जैसी. ये तो बड़ी सुगढ़ है, कितने प्यार से पैर दबा रही है मेरे. रुक जा बहू, मुझे अच्छा नहीं लगता, तू चार दिन के लिये आयी है और मैं तुझसे सेवा करा रही हूं"

मैंने कहा "तो क्या हुआ मौसी, आप तो मेरी मां जैसी हो, इसकी सास हो, फ़र्ज़ है इसका" मन में कहा कि मौसी, आप नहीं जानती ये क्या फ़टाका है, जरूर कोई गुल खिलाने वाली है नहीं तो ये और किसी के पैर दबाये! हां और कुछ भले ही दबा ले. फ़िर लीना की की बात याद आयी, मुझे हंसी आने लगी, मौसी भी कोई कम नहीं है, आज अच्छी जुगल बंदी होगी दोनों की.

लीना मेरी ओर देखकर बोली "तुम यहां क्या कर रहे हो, मैं मौसी की मालिश भी कर देती हूं, तुम घूम आओ बाहर. मौसाजी नहीं हैं क्या?"

मौसी बोलीं "अरे वे खेत पर होंगे रघू के साथ. तू घूम आ अन्नू. मिलें तो कहना कि खाने में देर हो जायेगी, आराम से आयें तो भी चलेगा, तू भी आना आराम से घूम घाम कर. ये राधा भी गायब है, वहां कही दिखे तो बोलना बेटे कि बजार से सामान ले आये पहले, फ़िर आकर खाना बना जाये, कोई जल्दी नहीं है. वो खेत पे घर है ना रघू का, वहीं होंगे तेरे मौसाजी शायद"

लगता था दोनों मुझे भगाने के चक्कर में थीं. मेरा माथा ठनका पर क्या करता. वैसे लीना की करतूत देखकर मुझे मजा आ रहा था, जरूर अपना जाल बिछा रही थी मेरी वो चुदक्कड़ बीबी. और मौसी भी कोई कम नहीं थी, बार बार ’बहू’ ’बहू’ करके लीना के बाल प्यार से सहला रही थी.

घर के बाहर आकर मैं थोड़ी देर रुका. फ़िर सोचा देखें तो कि लीना क्या कर रही है. अब तक तो पूरे जोश से अपने काम में लग गयी होगी वो चुदैल. मैं घर के पिछवाड़े आया. मौसी के कमरे की खिड़की बंद थी, अंदर से किसीकी आवाज आयी तो मैं ध्यान देकर सुनने लगा. लगता था मौसी और लीना बड़ी मस्ती में थीं.

"ओह .... हां बेटी .... बस ऐसे ही ... अच्छा लग रहा है .... आह ..... आह ..... और जोर से दबा ना ...... ले मैं चोली निकाल देती हूं .....हां ... अब ठीक है"

"ऐसे कैसे चलेगा मौसी, ये ब्रा भी निकालो तब तो काम बने, ऐसे कपड़े के ऊपर से दबा कर क्या मजा आयेगा" लीना की आवाज आयी. "वैसे मौसी आप ब्रा पहनती होगी ऐसा नहीं लगा था मेरे को. गांव में तो ..."

"बड़ी शैतान है री तू. मैं वैसे नहीं पहनती ब्रा पर आज पहन ली, सोचा शहर से बेटा बहू आ रहे हैं ... मौसी को गंवार समझेंगे ..."

"आप भी मौसी ... चलिये निकालिये जल्दी"

"ले निकाल दी .... हा ऽ य ... कैसा करती है री ..... आह .... अरी दूर से क्या करती है हाथ लंबा कर कर के, पास आ ना ... बहू .... मेरे पास आ बेटी .... मुझे एक चुम्मा दे .... तेरे जैसी मीठी बहू मिली है मुझे .... मेरे तो भाग ही खुल गये .... आज तुझे जब से देखा है तब से .... तरस रही हूं तेरे लाड़ प्यार ... करने को ... और लीना बेटी जरा मुंह दिखाई तो करा दे अपनी ... तू तो बड़ी होशियार निकली लीना ... जरा भी वक्त नहीं लिया तूने अपनी मौसी की सेवा करने को ... हा ऽ य ... आह ... " मौसी सिसककर बोलीं.

लीना की आवाज आयी "अब आप जैसी मौसी हो तो वक्त जाया करने को मैं क्या मूरख हूं! और मुंह देखना है मौसी बहू का कि और कुछ देखना है? ... ठहरिये मैं भी जरा ये सब निकाल देती हूं कि आप बहू को ठीक से देख सकें ... ये देखिये मौसी .... पसंद आयी मैं आपको? ... और लो आप कहती हैं तो पास आ गयी आप के ... आ गयी आप की गोद में ...अब करो लाड़ अपनी बहू के ... जरा देखूं मैं आप को कितनी अच्छी लगती हूं ... बड़े आग्रह से बुलाया है अपने गांव ... अब देखें जरा बहू कितनी अच्छा लगती है आप को" फ़िर सन्नाटा सा छा गया, सिर्फ़ हल्की हल्की चूमा चाटी की आवाजें आने लगीं. मेरा लंड तन गया और मुझे हंसी भी आ गयी. लीना अपने काम में जुट गयी थी.

मैं खेत की ओर चलने लगा. मौसाजी का खेत अच्छा बड़ा था, दूर तक फ़ैला था. दूर पर एक छोटा पक्का मकान दिख रहा था. मौसी शायद उसी मकान के बारे में कह रही थीं. मैं उसकी ओर चल दिया. वहां जाकर मैंने देखा कि दरवाजा बंद था. एक खिड़की थोड़ी खुली थी. उसमें से बातें करने की आवाजें आ रही थीं.

न जाने क्यों मुझे लगा कि दरवाजा खटखटाना या अंदर जाना ठीक नहीं होगा, कम से कम इस वक्त नहीं. मैं खिड़की के नीचे बरामदे में बैठ गया और धीरे से सिर ऊपर करके अंदर देखने लगा. फ़िर अपने आप को शाबासी दी कि दरवाजा नहीं खटखटाया.

दीपक मौसाजी पैजामा उतार के चारपाई पर बैठे थे और राधा उनका लंड चूस रही थी. रघू उनके पास खड़ा था, मौसाजी उसका खड़ा लंड मुठ्ठी में पकड़कर मुठिया रहे थे. "मस्त खड़ा है मेरी जान, और थोड़ा टमटमाने जाने दे, फ़िर और मजा देगा" वे बोले और रघू का लंड चाटने लगे. फ़िर उसको मुंह में ले लिया. रघू ने उनका सिर पकड़ा और कमर हिला हिला कर उनका मुंह चोदने लगा.

राधा मौसाजी का लंड मुंह से निकाल कर बोली "भैयाजी, देखो कितना मस्त खड़ा हो गया है, अब चोद दो मुझे" मौसाजी का लंड एकदम गोरा गोरा था और तन कर खड़ा था, ज्यादा बड़ा नहीं था पर था बड़ा खूबसूरत.

रघू बोला "भैयाजी को मत सता रानी, ठीक से चूस, और झड़ाना नहीं हरामजादी" राधा फ़िर चूसने लगी. उसने अपना लहंगा ऊपर कर दिया था और अपने हाथ से अपनी बुर खोद रही थी. मुझे उसकी काली घनी झांटें दिख रही थीं.

मौसाजी ने रघू का लंड मुंह से निकाला और बोले "अरे उसे मत डांट रघू, मैं आज चोद दूंगा उसको पहले, फ़िर गांड मारूंगा, बड़ी प्यारी बच्ची है, चूत भी अच्छी है पर गांड ज्यादा मतवाली है तेरी लुगाई की. अब तू पास आ और बैठ मेरे पास और चुम्मा दे"

रघू मौसाजी के पास बैठ गया. मौसाजी उसका मुंह चूसने लगे. साथ साथ उसका लंड भी मुठियाते जाते थे. रघू ने अपना हाथ उनके चूतड़ों पर रखा और दबाने लगा. मौसाजी थोड़ा ऊपर हुए और रघू ने उनकी गांड में उंगली डाल दी. मौसाजी ऊपर नीचे होकर रघू की उंगली अपनी गांड में अंदर बाहर करने लगे और अपने हाथों में रघू का सिर पकड़कर उसकी जीभ और जोर जोर से चूसने लगे.

"चल रधिया उठ, भैयाजी की गांड चूस" रघू ने चुम्मा तोड़ कर राधा से कहा और फ़िर से मौसाजी से अपनी जीभ चुसवाने लगा. राधा उठी और बोली "खड़े हो जाओ भैयाजी, जरा अपनी गोरी गोरी गांड तो ठीक से दिखाओ"

मौसाजी और रघू एक दूसरे को चूमते हुए खड़े हो गये. राधा मौसाजी के पीछे जमीन पर बैठ गयी और उनकी गांड चाटने लगी. एक दो बार उसने मौसाजी के चूतड़ पूरे चाटे, फ़िर उनका छेद चाटने लगी. मौसाजी ने रघू को बाहों में भीच लिया और बेतहाशा चूमने लगे. दो मिनिट बाद अलग होकर बोले "अब डाल दे राजा"

"रधिया चल लेट खाट पर, फ़िर तेरे ऊपर भैयाजी लेटेंगे" रघू ने कहा.

राधा बोली "रुको ना जी, ठीक से चाटने तो दो, इतनी प्यारी गांड है भैयाजी की" और फ़िर मौसाजी के चूतड़ों के बीच मुंह डाल दिया.

मौसाजी बोले "हाय जालिम, क्या प्यार से चूसती है ये लड़की, जीभ अंदर डालती है तो मां कसम मजा आ जाता है. अब बंद कर राधा बेटी, बड़ी कुलबुला रही है"  राधा उठ कर लहंगा ऊपर करके खाट पर लेट गयी. "भैया जी, आप की गांड तो लाखों में एक है, यहां गांव में किसी की नहीं होगी ऐसी, गोरी गोरी मुलायम, खोबे जैसी, मुझे तो बड़ा मजा आता है मुंह लगाकर. पर आप हमेशा टोक देते हो, अभी तो मजा आना शुरू हुआ था. किसी दिन दोपहर भर चाटूंगी आप की गांड. अब आप मरवाना बाद में, पहले मेरे को चोद दो आज ठीक से मालकिन की कसम, ऐसे बीच में सूखे सूखे ना छोड़ना हम को"

"अरी पूरा चोद दूंगा, पहले जरा अपनी जवानी का रस तो चखा दे, कितना बह रहा है देख" कहकर मौसाजी खाट पर चढ़कर राधा की बुर चूसने लगे. वो उनके सिर को अपनी चूत पर दबा कर कमर हिलाने लगी.

"क्या झांटें हैं तेरी राधा, मुंह डालता हूं तो लगता है किसी की ज़ुल्फ़ें हैं" मौसाजी मस्ती में बोले और फ़िर उसकी झांटों को चूमने लगे.

"होंगी ही भैयाजी, बाई ने दिया है, वो शैंपू से रोज धोती हूं और तेल लगाकर कंघी भी करती हूं." राधा बड़े गर्व से बोली.

उधर रघू जाकर तेल की शीशी ले आया और अपने लंड में चुपड़ लिया. फ़िर राधा को बोला "जरा चूतड़ उठा तो" राधा ने कमर ऊपर की तो रघू उसकी गुदा में तेल लगाने लगा.

"अरे मेरी गांड में काहे लगाते हो? बाबूजी की गांड में लगाओ" राधा अपनी बुर मौसाजी के मुंह पर रगड़ते हुए बोली.

"उनकी गांड तूने तो चिकनी कर दी है ना चुदैल. ऐसे चूसती है जैसे गांड नहीं, मिठाई हो" रघू बोला.

"भैयाजी की गांड बहुत मस्त है राजा, मजा आता है चूसने में, और तुम भी तो रोज मारते हो, तुम्हारी मलाई का भी स्वाद आता है भैयाजी की गांड से" राधा इतरा कर बोली. "अब रुको थोड़ा, मेरा पानी निकलने को है" फ़िर वो अपनी टांगें मौसाजी के सिर के आस पास पकड़कर सीत्कारने लगी. "चोदो ना बाबूजी अब ..... चोद दो मां कसम तुमको .... हाय .... डालो ना अंदर भैयाजी"

"अरी दो मिनिट रुक ना, ये जो अमरित निकाल रही है अपनी बुर से वो काहे को है" कहकर मौसाजी जीभ निकाल निकाल कर राधा की पूरी बुर ऊपर से नीचे तक चाटने लगे. फ़िर खाट पर चढ़ गये और अपना लंड राधा की बुर में डालकर चोदने लगे. "ले रानी .... चुदवा ले .... और अपनी गांड को कह तैयार रहे .... अब उसी की बारी है .... रघू बेटे .... तू मस्त रख अपने सोंटे को .... बहुत मस्त खड़ा है ... उसको नरम ना पड़ने दे ... मेरी गांड बहुत जोर से पुकपुका रही है"

रघू खड़ा खड़ा एक हाथ से अपने लंड को मस्त करने लगा और दूसरे हाथ की उंगली मौसाजी की गांड में डाल के अंदर बाहर करने लगा. "आप फ़िकर मत करो बाबूजी, आप की पूरी खोल दूंगा आज, बस आप जल्दी से इस हरामन को चोदो और तैयार हो जाओ"

मौसाजी कस कस के धक्के लगाने लगे. रघू ने अपना हाथ मौसाजी के पेट के नीचे से राधा की टांगों के बीच घुसेड़ा और उंगली से राधा के दाने को रगड़ने लगा. वो ’अं ऽ आह ऽ ..... उई ऽ .... मां ऽ " कहती हुई कस के हाथ पैर फ़टकारने लगी और कसमसा कर झड़ गयी. फ़िर रघू पर चिल्लाने लगी "अरे काहे इतनी जल्दी झड़ा दिये मोहे .... बाबूजी मस्त चोद रहे थे ..."

"तू तो घंटे भर चुदवाती रहती, बाबूजी गांड कब मारेंगे तेरी? चल ओंधी हो जा" रघू ने राधा को फ़टकार लगायी. वो पलट कर पेट के बल खाट पर सो गयी. "डालो बाबूजी, फ़ाड़ दो साली की गांड" रघू बोला.

मौसाजी तैश में थे, तुरंत अपना लंड राधा के चूतड़ों के बीच आधा गाड़ दिया.

"धीरे भैयाजी, दुखता है ना" राधा सीत्कार कर बोली.

रघू ने गाली दी "चुप साली हरामजादी, नखरा मत कर, रोज मरवाती है फ़िर भी नाटक करती है"

"बहुत टाइट और मस्त है मेरी जान, न जाने क्या करती है कि मरवा मरवा कर भी गांड टाइट रहती है तेरी" मौसाजी बोले और फ़िर एक झटके में पूरा लंड उन सांवले चूतड़ों के बीच उतार दिया.

"बाबूजी .... हा ऽ य .... आप का बहुत बेरहम है ....मुझे चीर देता है .... लगता है दो टुकड़े कर देगा ..." राधा कसमसा गयी. फ़िर रघु को बोली "अरे ओ मेरे चोदू सैंया ... आज बाबूजी की फ़ाड़ दे मेरी कसम .... तेरी बीबी की गांड रोज फ़ुकला करते हैं ... आज इनको जरा मजा चखा दे"

मौसाजी मस्त होकर बोले "आ जा रघू बेटे ... मार ले मेरी .... मां कसम आज बहुत कसक रही है"

"क्यों नहीं .... आज घर में नयी जवान जोड़ी आयी है ना ... बहू भांजे की" राधा ने ताना मारा. रघू ने मौसाजी के चूतड़ चौड़े किये और अपना लंड धीरे धीरे उनके बीच उतारने लगा.

"आह ... मजा आ गया .... ऐसे ही .... डाल दे पूरा मेरे राजा .... और पेल मेरे शेर" मौसाजी मस्ती में चहकने लगे.

"बाबूजी आज पूरा चोद दूंगा आप को ... धीरज रखो .... ये लंड आप के ही लिये तो उठता है .... आप की खातिर मैं इस राधा को भी नहीं चोदता ..... आह ... ये लो ... अब सुकून आया?" रघू ने जड़ तक लंड मौसाजी के चूतड़ों के बीच गाड़कर पूछा.

"आहाहा ... मजा आ गया .... वो बदमाश रज्जू भी होता तो और मजा आता .... कहां मर गया वो चोदू" दीपक मौसाजी कमर हिला हिला कर रघू का लंड पिलवाते हुए बोले.

"आपही ने तो भेजा उसको बजार. अभी होता तो आपके मुंह में लंड पेल देता बाबूजी, आप का मुंह ऐसे खाली नहीं रहता." राधा बोली.

"भैयाजी, वैसे तो रज्जू बहूरानी को घूर रहा था दोपहर को, बहूरानी ने रिझा लिया है उसको" रघू बोला.

"हां लीना भाभी की चूंचियां देखीं होंगी ना उसने! तुमने नहीं देखा जी, क्या मस्त दिख रही थीं ब्लाउज़ के ऊपर से. मेरा तो मन मुंह मारने को हो रहा था" राधा पड़ी पड़ी गांड मरवाते हुए बोली.

"अरी ओ रधिया, मौसी से पूछे बिना कुछ लीना भाभी के साथ नहीं करना. मुंह मारना है तो मौसी के बदन में मार जैसे रोज करती है" रघू बोला, वो अब घचाघच दीपक मौसाजी को चोद रहा था.

"बाबूजी, आप चुप चुप क्यों हो, बहूरानी अच्छी नहीं लगी क्या" राधा बोली.

"अरे जरूर लगी होगी. पर अनिल भैया ज्यादा पसंद आये होंगे भैयाजी को, है ना भैयाजी?" रघू बोला.

मौसाजी कुछ कहते इसके पहले मैं वहां से चल दिया. मेरी इच्छा तो थी कि रुक कर सब कुछ देखूं पर मेरा लंड ऐसे सनसना रहा था कि रुकता तो जरूर मुठ्ठ मार लेता या अंदर जा कर उनमें शामिल हो जाता जो बिना लीना की अनुमति के मैं नहीं करना चाहता था. और रज्जू आ रहा था, दूर से खेत में दिख रहा था, उसकी नीली शर्ट से मैंने पहचान लिया. वो देख लेता तो फ़ालतू पचड़ा हो जाता. इसलिये बेमन से मैंने धीरे से खिड़की बंद की और चल दिया.

रज्जू पास आया तो मुझे देखकर रुक गया और नमस्ते की.

मैंने पूछा "कैसे हो रज्जू? घर जा रहे हो लगता है?"

"हां भैयाजी. आप अकेले ही आये घूमने, भाभीजी को नहीं लाये?" उसने पूछा.

"वो मौसी के साथ है, मैं अकेला ही घूम आया. लगता है मौसाजी तुम्हारे घर पर ही हैं, रघू और राधा के साथ बातें कर रहे थे" मैंने कहा.

रज्जू कुछ नहीं बोला. नीचे देखने लगा.

"वैसे मैं अंदर नहीं गया, बस खिड़की से उनकी बातें सुनीं. तुम्हारा जिक्र कर रहे थे मौसाजी, बोले तुम भी होते तो अच्छा होता" मैंने मुस्करा कर कहा.

रज्जू मेरी ओर कनखियों से देख कर मुस्करा कर बोला "हां अनिल भैया, मौसाजी को बड़ी फ़िकर रहती है हम सब की. हम तीनों मिलकर उनकी सेवा करते हैं जैसी हो सकती है, आज मैं नहीं था तो नाराज हो गये होंगे. मैं जा कर देखता हूं"

"रज्जू, भई तुम्हारी लीना भाभी को खेत में घूमना है, पहली बार गांव आई है, उसको घुमा लाना कभी. गांव को हमेशा याद करे ऐसी खुश होनी चाहिये तेरी लीना भाभी" मैंने कहा.

"हां अनिल भैया, भाभी को तो ठीक से पूरा घुमा दूंगा. आप नहीं चलोगे घूमने? हम तो आप को भी घुमा देंगे आप का मन हो तो" रज्जू ने पूछा.

"हां, देखूंगा. मौसी से जरा पूछ लूं कि क्या प्रोग्राम है. पहले लीना को तो घुमा, ठीक से घुमाया तो मैं भी घूम लूंगा" मैंने उसकी ओर देखा और बोला.

रज्जू मुस्कराकर अच्छा बोला और अपने घर की ओर चल दिया.

पड़ोसन विधवा भाभी- Sexy Stories in hindi

September 11, 2016 Add Comment
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Phobia 2016 Hindi 720p DVDRip 800mb

August 08, 2016 Add Comment

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IMDB Ratings: 9.8/10
Genres: Drama, Mystery, Thriller
Language: Hindi
Quality: 720p DVDRip
Size: 815mb
Director: Pawan Kripalani
Writers: Pawan Kripalani, Devayush Chowdhary
Stars: Radhika Apte, Ankur Vikal
Movie Plot: An agoraphobic young woman, traumatized by past events, finds herself trapped and terrorized in her own home.
Phobia 2016 Hindi 720p DVDRip

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Warcraft 2016 Dual Audio Hindi 720p WEB-DL 1.1GB

August 08, 2016 Add Comment

Warcraft 2016 Dual Audio Hindi 720p WEB-DL 1.1GB

 

Warcraft 2016 Dual Audio Movie Download
IMDB Ratings: 7.9/10
Genres: Action, Adventure, Fantasy
Language: Hindi + English
Quality: 720p WEB-DL
Size: 1119mb
Director: Duncan Jones
Writers: Duncan Jones, Charles Leavitt
Stars: Travis Fimmel, Paula Patton, Ben Foster
Movie Plot: The peaceful realm of Azeroth stands on the brink of war as its civilization faces a fearsome race of invaders: orc warriors fleeing their dying home to colonize another. As a portal opens to connect the two worlds, one army faces destruction and the other faces extinction. From opposing sides, two heroes are set on a collision course that will decide the fate of their family, their people, and their home.
Warcraft 2016 Dual Audio Hindi 720p WEB-DL

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Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai

June 01, 2016 1 Comment
प्यारे दोस्तो, मेरा नाम वीरू, बीस साल का हूँ। Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai मैं कॉलेज के प्रथम वर्ष में हूँ। मैं एक मध्यवर्गीय परिवार से हूँ। मैं शर्मीले स्वभाव का सीधा सा दिखने वाला लड़का हूँ, राजस्थान के श्री गंगानगर में रहता हूँ।
मैं आपको अपनी पड़ोसन जिया के साथ हुए पहला अनुभव बताने जा रहा हूँ। वह 18 साल की एक ख़ूबसूरत और गोरी-चिट्टी लड़की है, उसकी चूचियाँ इतनी मदमस्त कर देने वाली हैं कि किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मेरा और उसका घर एक दम साथ-साथ था। मेरे को वो बहुत अच्छी लगती थी। पर मैं उससे कभी बात नहीं कर पाया, मेरा मन बहुत करता था उससे बात करने का और उसको पटाने का, पर यह कैसे होगा समझ नहीं आता था।
मेरे को एक आईडिया आया, उसका एक छोटा भाई था राहुल। मैंने उसको पटाने की सोची, अगर इसको पटा लिया तो जिया को पटाना आसान हो जायेगा। इसलिए मैं जिया के भाई को पटाने लगा और उसके साथ खेल खेलने लगा। उसको अपने घर पर बुला कर पीसी पर गेम भी खिलाता, इस तरह वो मेरे साथ रहने लग गया और कभी कभी मैं भी उसके घर भी चला जाता। कुछ समय बाद जिया से भी मेरी थोड़ी-थोड़ी बातें होने लग गई और हम एक साथ मिल कर खेलने लग गए।
पर मैं तो जिया को पटा कर चोदना चाहता था, पर कैसे हो सकता था। मैं नए-नए आईडिया सोचने लग गया कि किस तरह जिया को चोदूँ, मेरे मन में फ़िर एक आईडिया आया।
मैं एक ब्लू फिल्म की सीडी लेकर आया, उस दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे। मैंने अपनी छत से उसकी छत पर पर उस सीडी को फेंक दिया और अपनी छत पर घूमने लग गया। उसने मुझे देखा और वो भी छत पर आ गई और आते ही उसको वो सीडी मिल गई। वो मेरे पास उस सीडी को ले कर आई और बोली- यह सीडी छत पर मिली है।
मैंने पूछा- क्या है इसमें ?
तो उसने बोला- मुझे नहीं पता, मुझे तो छत पर पड़ी मिली है।
मैं उससे कहा- चलो देखते हैं कि क्या है इसमें !
तो वो राजी हो गई और मैं अपनी छत से उसकी छत पर आकर उसके घर पर चला गया।
वो जाते ही सीडी प्लेयर में उस सीडी को लगाने लगी। मेरा दिल बहुत जोर जोर से धक-धक कर रहा था, पता नहीं क्या होगा। कहीं उसने अपने घर वालों को इसके बारे में बता दिया तो?
मैं बहुत डर गया था।
उसने सीडी लगा कर टीवी ऑन किया। मैं अभी भी डर रहा था और टीवी चालू होते ही एक लड़का और एक लड़की आपस बातें कर रहे थे।
उसने मुझ से कहा- यह कोई हॉलीवुड फिल्म लगती है !थोड़ी देर में उस लड़के ने उस लड़की के सारे कपड़े उतार दिए। उसने एक दम अनजान की तरह कहा- ये क्या कर रहे हैं?
तो मैंने उससे कहा- यह एक ब्लू फिल्म है। पहले नहीं देखी क्या कभी ? उसने कहा- नहीं तो।
फिर धीरे धीरे वो लड़का उस लड़की की चूचियाँ दबाने और चूसने लग गया। उस लड़की ने उस लड़के के भी सारे कपड़े उतार दिए और फिर उसका लण्ड चूसने लग गई।
उसने कहा- मुझे तो शर्म आ रही है, कितने गंदे है ये।
मैंने उससे कहा- ऐसे तो सब लोग ही करते हैं, इसको ही तो सेक्स बोलते हैं।
मैंने उससे पूछा- तूने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- नहीं किया।
मैंने उससे कहा- इसमें बहुत मजा आता है।
तभी मैंने उसके पास जाकर बैठ गया और अपना हाथ धीरे उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली- यह क्या कर रहे हो तुम?
मैंने कुछ न बोलते हुए फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा और उसके टॉप के ऊपर से चूचियाँ दबाने लगा। उस समय उसकी शक्ल देख कर ऐसा लग रहा था कि उसको मजा आ रहा था। फिर मैं दोनों चूचियों को एक साथ मसल मसल कर दबाने से ऐसा लगा और फिर मैं उसके टॉप मैं हाथ डाल कर चूचियों दबाने लगा और वो सिसकियाँ लेने गई। अब मुझे पता चल गया कि उसको मजे आ रहे हैं।
मैंने उसको पूछा- मज़ा आ रहा है क्या?
तो उसने कहा- हाँ, आ रहा है। क्या इसको ही सेक्स कहते हैं?
मैंने कहा- अभी तो कुछ भी नहीं हुआ है, अभी तो और बहुत मजे आयेंगे।
उसने- कहा कैसे?
तो मैं कहा- तुझे मेरा साथ देना होगा !
तो उसने हामी भर दी।
मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। वो बहुत ही गोरी थी और गोरे रंग पर लाल रंग बहुत सुन्दर लग रहा था। फिर मैंने दोनों को उतार फेंका। मैं पहली बार किसी लड़की की नंगी चूत के दर्शन कर रहा था, उसकी चूत में हल्के भूरे रंग के बाल थे।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है !
और उसने अपने दोनों हाथ अपनी चूत और मोमो पर लगा लिए।
मैंने कहा- इसमें शर्माने की क्या बात है? सेक्स तो नंगे होकर ही किया जाता है।
मैंने प्यार से उसके दोनों हाथ हटा दिए और उसकी दोनों चूचियों को चूमने लगा तो वह पागल होने लगी। मैंने दूसरा हाथ उसकी चूत पर रखा, उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी। अब मैं समझ गया कि ज़िया एक दम चुदने को तैयार है।
पर मैं उस को इतनी जल्दी नहीं चोदना चाहता था। इसलिए मैं उसकी चूत में अपनी एक उंगली डालने लगा और थोड़ी सी उंगली अन्दर जाते ही वह चिहुँक उठी,”दर्द हो रहा है।”
तो मैंने कहा,”जान पहली बार ज़रा दर्द होता है, आज तो इस दर्द सहन करना ही पड़ेगा।”
उसने कहा,” ठीक है।”
फिर मैं उसको ऊँगली से चोदने लगा और उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी। फिर मैंने उसको मेरी शर्ट-पैंट उतारने के लिए बोला।
उसने कहा- मुझे शर्म आ रही है।
मैंने कहा- अब काहे की शर्म !
और मेरे कपड़े उतारने के लिए बोला तो उसने मेरी शर्ट-पैंट उतार दी और लगे हाथ अण्डरवियर भी उतारने को बोला। ना ना करते हुए उसने उसको भी उतार ही दिया। उसने मेरा लण्ड देखा और अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने उससे कहा- यह प्यार करने की चीज है इससे मुँह नहीं मोड़ा करते।
फिर मैंने उसके दोनों हाथ आँखों से हटा दिए और उसको अपना लण्ड दिखाते हुए कहा- इसको लण्ड बोलते हैं और इसको ही चूत में डाल कर चुदाई करते हैं जिससे चूत और लण्ड का मिलन होता है। इस को अन्दर डालने से दोनों को बहुत मजा आता है !
तो उसने कहा- इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा? यहाँ तो उंगली भी ठीक से अन्दर नहीं जा रही है।
तो मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, सब कुछ हो जायेगा। पर इसको चूत में डालने से पहले चूसना पड़ता है।
मैंने अपना लण्ड पकड़ कर उसके मुँह में डाल दिया। पहले तो उसने मुँह में लेते ही निकाल दिया। मैंने उसके मुँह में फिर से अपना लण्ड डाल दिया तो इस बार वो धीरे धीरे मेरे लण्ड का सुपारा चूसने लग गई और धीरे धीरे अपना सारा लण्ड उसके मुँह में अंदर-बाहर करने लग गया।
फिर मैंने उस को बेड पर लिटाया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को उंगली और जीभ से चोदने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और बोली- वीरू ! थोड़ा धीरे करो, मुझे दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- दर्द तो हो रहा है पर मज़ा आ रहा है या नहीं?
वो बोली- हाँ ! मज़ा तो आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।
मैंने कहा- थोड़ी देर में यह दर्द खत्म हो जाएगा।
उसके मुँह से कामुक सिसकियाँ निकल रही थी। उसके मुँह से आवाजें आने लगी- सी……सी…स्…आ…अच्छा लग रहा … और चूसो और !
उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और उसकी चूत ने अंदर से सफ़ेद सफ़ेद सा पानी छोड़ दिया। जिसे मैंने अपने मुँह पर महसूस किया और मेरा भी वीर्य निकलने वाला था और मैं उसके मुँह में झड़ गया।
उसने कहा- यह क्या है?
मैंने कहा- प्यार की निशानी है। उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
इसके बाद मैंने उसे सोफे पर बैठा दिया और अंदर से तेल की शीशी ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर तेल लगा लिया फिर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। इससे उसकी चूत मेरे लण्ड के करीब आ गई और मैं अपना लण्ड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। ज़िया सिसकारियाँ भरने लगी।
फ़िर मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और अंदर करने लगा। जिया की चूत कुंवारी होने के कारण काफी कसी थी। मैंने जोर लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल दिया। लण्ड का सुपारा ही अंदर गया था कि जिया जोर जोर से चीखने लगी। अपने हाथ-पाँव मारने लगी और बोलने लगी- मुझे छोड़ दो ! मुझे कुछ नहीं करना।
मैंने अपने हाथों से उसका मुँह बंद कर दिया और जोर-जोर से धक्के लगा कर अपना लण्ड उसकी चूत में घुसाने लगा। अभी आधा ही अंदर गया था कि उसकी आँखों से आंसू आने लगे और उसका मुँह बंद था। मैंने धक्के लगाने चालू रखे। मेरे हाथ से बंद होने के कारण उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाजें आने लगी। मैं समझ गया कि उसको मजे आ रहे हैं, मैंने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया, उसके मुँह से सी सी की आवाज आ रही थी।
मुझे उसकी चूत से कुछ बहने का अहसास हुआ, नीचे देखा तो उसकी चूत पूरी खून से भरी हुई थी। मैंने इस पर ध्यान ना देते हुए एक और जोर का झटका दिया जिससे मेरा तीन चौथाई लण्ड उसकी चूत में समा गया। इस झटके के लिए वो तैयार नहीं थी। और इस झटके के साथ ही जिया अपना सर जोर जोर से इधर उधर पटकने लगी। अब मैं थोड़ी देर के लिए रुका और उसके मम्मे मसलने लगा। उसके होठों को चूमने लगा, अपने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। अब उसका सर पटकना कुछ कम हुआ और वो भी धीरे धीरे अपने चूतड़ उछालने लगी।
वो बोली- तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी, एक बार लगा कि मैं जिन्दा बच पाउंगी।
मैं बोला- मेरी जान ! दर्द तो एक बार हुआ होगा, लेकिन अब मज़ा आ रहा है या नहीं?
जिया ने कहा- हाँ, मज़ा तो बहुत आ रहा है, बस ऐसे ही अपने लण्ड को मेरी चूत में डालते रहो। सच में आज ज़न्नत जैसा अहसास हो रहा है।
मैंने कहा- मेरी जानू ! अभी तुमने ज़न्नत देखी ही नहीं है, आगे आगे देखो, मैं तुम्हें क्या क्या और दिखाता हूँ।
इतना कहते ही मैंने एक जोरदार धक्का लगा कर अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया। जिया इस अचानक हुए हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी, इस कारण उसकी जोर की चीख निकल गई और बोली- प्लीज़ ! तुम अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल लो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी, प्लीज़ निकाल लो अपना लण्ड ! मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ।
मैं उसकी बातों पर ध्यान ना देकर उसके मम्मे चूसने लगा और अपने लण्ड को उसकी चूत धीरे धीरे आगे पीछे पेलने लगा। थोड़ी देर में उसको पूरा मज़ा आने लगा। उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लण्ड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी। वो अपनी गाण्ड ऊपर नीचे उछालने लगी और बोलने लगी- यस यस्स्स और जोर से चोदो वीरू , मेरी चूत फ़ाड़ दोओअओ, चोदो और जोर से चोदते जाओ, मेरी चूत को फ़ाड़ दो और मेरी चूत की प्यास को मिटा दो।
इस पर मैं उसको और जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया।
मैंने अपनी गति बढ़ाई, फिर भी वह ज़ोर से करो ! की रट लगा रही थी।
मैंने कहा- हाँ जान और ज़ोर से करूँगा।
फिर मैंने उसके दोनों पाँव उठाए और काफी तेज़ी से लण्ड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। और थोड़ी ही देर में मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में डाल दिया। वो भी मेरे साथ ही झड़ गई, फिर हम दोनों एक साथ ले लेट गए।
फिर तो मैंने और जिया ने एक बार और सेक्स किया! उसको घोड़ी स्टाईल में खड़ा कर उसकी गांड में लण्ड घुसाने लगा। उसकी गांड भी बहुत कसी थी। मैंने पूरा दम लगा कर पूरा का पूरा लण्ड उसकी गांड में पेल दिया और धक्के मारने लगा। एक बार तो उसको दर्द हुआ फिर उसको और मज़ा आने लगा। उसके चूतड़ मुझे बहुत ही आनंद दे रहे थे। दो-तीन मिनट में ही वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और लण्ड को गांड से निकाल कर फिर से उसकी चूत में डाल दिया। कुछ ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा।
उसने कहा- खूब ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगाओ।
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लण्ड भीग गया। मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग बीस मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी तीन बार झड़ चुकी थी। लण्ड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
अब मुझे दर लगने लगा कि वो कहीं गर्भवती न हो जाये इसलिए मैंने उसको ई-पिल लाकर खिला दी।
अब जब कभी वो अकेली होती तो हम सेक्स करते और आज तक मैं उसके साथ सेक्स कर रहा हूँ।